अजित बताते हैं कि एकॉस्टिकल स्कैनिंग इमेजिंग तकनीक से विमान और अंतरिक्ष यान की गहनता से निगरानी की जा सकेगी। यह तकनीक मोटी दीवार के आरपार की गतिविधियों की तस्वीर खींचने में भी सक्षम है। यह तकनीक विमान की बॉडी के किसी हिस्से के कमजोर हो जाने अथवा आंखों से सीधे न देखे जाने लायक छिद्रों को भी आसानी से पकड़ लेती है।
दरअसल, एयरोस्पेस उद्योग में ईंधन प्रणालियों, हाइड्रोलिक लाइनों और दबावयुक्त केबिनों में मामूली छिद्र या लीकेज अक्सर बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बन जाते हैं। एकॉस्टिकल स्कैनिंग इमेजिंग तकनीक ऐसी खतरनाक आहटों का पहले ही सटीक पता लगाकर विमान परिचालन को बेहद सुरक्षित बना देगी। इससे विनाशकारी घटनाएं रोकना भी संभव हो सकेगा।
सबसे कम हानि पहुंचाने वाली तकनीक
स्कैनिंग एकॉस्टिक माइक्रोस्कोपी सबसे कम हानि पहुंचाने वाली ऐसी इमेजिंग तकनीक है, जो ध्वनि तरंगों का उपयोग करके अपारदर्शी सामग्री की आंतरिक विशेषताओं की जांच करती है। नैनोफ्ल्यूड्स का इस्तेमाल किए जाने के कारण अल्ट्रासोनिक बीम का इसमें दुष्प्रभाव सबसे कम होता है। अजित के मुताबिक, यह दुनिया की सबसे कम खतरे वाली जांच तकनीक है। यह बायोलॉजिकल नमूनों की जांच के लिए और अधिक उपयोगी है।