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उपलब्धियों, कार्यकर्ताओं की फौज के बल मैदान मारेगी सपा

Thu, 13 Aug 2015 01:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। समाजवादी पार्टी की साइकिल यात्रा का समापन बुधवार को जिला मुख्यालय में जनसभा के साथ हुआ। करीब चार घंटे चली सभा में पार्टी के कार्यकर्ता पूरी तरह अव्यवस्थित रहे। इस बीच मंच पर बैठे वरिष्ठ नेता कार्यकर्ताओं से संयम बरतने की अपील करते रहे, लेकिन हमेशा की तरह कार्यकर्ता कहां किसी की सुनने वाले। जिला मुख्यालय की ओर आने वाली सड़क पर कार्यकर्ता गाजे-बाजे के साथ जुलूस में नजर आए। इस बीच जनसभा में प्रदेश सरकार के कार्यों और उपलब्धियों का बखान किया गया।
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मुख्य अतिथि सपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व सांसद कुंवर रेवती रमण सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब पिछड़ा नहीं है। लखनऊ में मेट्रो रेल, लखनऊ-आगरा हाईवे, स्मार्ट सिटी एवं कई बिजली परियोजनाओं की स्थापना कर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने तीन वर्ष में  20 साल का काम कर दिया। उन्होंने कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि सरकार के कार्यों को जन-जन तक पहुंचाएं। दावा किया कि 2016 से गांवों को 16 और शहर में 20-20 घंटे बिजली मिलेगी। अध्यक्षता कर रहे जिलाध्यक्ष कृष्ण मूर्ति सिंह यादव ने कहा कि सपा के पास कार्यकर्ताओं की फौज है। आगामी चुनाव में प्रदेश सरकार के कार्यों के बल पर चुनाव लड़ा जाएगा। उन्होंने प्रधानमंत्री को जादूगर बताया। कहा कि अच्छे दिन का सपना दिखाने वाले पीएम मोदी ने जनता को गुमराह किया।

पूर्व सांसद रामपूजन पटेल, अतीक अहमद, धर्मराज सिंह पटेल ने मुखिया मुलायम सिंह यादव को सबसे बड़ा समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष नेता बताया। रैली प्रभारी लाखन सिंह ने मुख्यमंत्री को दूरदर्शी एवं ईमानदार शासक बताया। संचालन महानगर अध्यक्ष सैयद इफ्तेखार हुसैन, महासचिव योगेश यादव एवं नाटे चौधरी ने किया। इसमें नरेंद्र सिंह, विधायक अंसार अहमद, सत्यवीर मुन्ना, गामा पांडेय, विजमा यादव, प्रशांत सिंह, हाजी परवेज अहमद, पूर्व विधायक मोहम्मद अशरफ, पूर्व महानगर अध्यक्ष केके श्रीवास्तव, गुलाब सिंह यादव, दिनेश सिंह, भोला नाथ गुप्ता आदि ने विचार व्यक्त किए।
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सपा की जिला मुख्यालय पर हुई जनसभा में कुछ कार्यकर्ता घोड़ों पर सवार होकर पहुंचे। करीब आधा दर्जन कार्यकर्ता घोड़ों को लेकर भीड़ में घुस गए। इससे वहां अफरातफरी मच गई। मंच संचालक घोड़े पर सवार कार्यकर्ताओं को जनसभा से बाहर जाने की अपील करते रहे लेकिन काफी मशक्कत के बाद उन्हें वहां से हटाया जा सका। मामला सत्ताधारी दल होने के कारण पुलिस भी मूकदर्शन बनी रही।
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