प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भइया) विश्वविद्यालय में आचार्य रामचंद्र शुक्ल की इतिहास दृष्टि विषय
प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भइया) विश्वविद्यालय में सोमवार को आचार्य रामचंद्र शुक्ल की 142वीं जयंती के उपलक्ष्य पर संगोष्ठी का आयोजन किया।
मुख्य अतिथि रामचंद्र शुक्ल साहित्य शोध संस्थान की अध्यक्ष डॉ. मुक्ता ने ऑनलाइन माध्यम से आचार्य शुक्ल को हिंदी निर्माता बताते हुए उनके बाल्यकाल से ही लेखन के प्रति रुझान और इतिहास लेखन की यात्रा पर प्रकाश डाला। डॉ. मुक्ता ने कहा कि जायसी व तुलसीदास को हिंदी साहित्य में प्रतिष्ठित करने में आचार्य शुक्ल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने कहा कि साहित्य को समाज से जोड़ने वाले इतिहासकार थे।
विशिष्ट अतिथि डॉ. अलका प्रकाश ने कहा कि आचार्य रामचंद्र शुक्ल हिंदी साहित्य के इतिहास, आलोचना और निबंध परंपरा के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। उन्होंने साहित्य को केवल राजाओं व काल्पनिक कथाओं तक सीमित न रखकर सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों से जोड़ा। शुक्ल का मानना था कि किसी युग का साहित्य वहां की जनता की चित्तवृत्ति का प्रतिबिंब होता है।
मुख्य संरक्षक कुलपति डॉ. अखिलेश कुमार सिंह और समन्वयक हिंदी विभागाध्यक्ष व कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. आशुतोष कुमार सिंह रहे। संचालन डॉ. अजीत सिंह व धन्यवाद ज्ञापन डॉ. बब्लू यादव ने किया। इस मौके पर प्रियंका त्रिपाठी, किसलय सिंह, कोमल यादव, सुमन लता आदि मौजूद रहीं।