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दिल्ली से पकड़ा गया लोक सेवा आयोग अध्यक्ष से अभद्रता करने वाला

Mon, 25 Nov 2019 03:51 AM IST
इलाहाबाद ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
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UPPSC - फोटो : अमर उजाला
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उप्र लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रभात कुमार व बेसिक शिक्षा परिषद सचिव रूबी सिंह को एसएमएस भेजकर गालीगलौज करने का आरोपी दिल्ली से दबोच लिया गया। गिरफ्तारी की धाराएं नहीं होने की वजह से बयान दर्ज कर व नोटिस तामील कराकर पुलिस टीम रविवार को लौट आई।

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आयोग अध्यक्ष व बेसिक शिक्षा परिषद सचिव से फोन पर अभद्रता का मामला 22 नवंबर को सामने आया था। दोनों अफसरों के पास न सिर्फ कई बार कॉल की गई, बल्कि उन्हें आपत्तिजनक बातें लिखा एसएमएस भी भेजा गया। अध्यक्ष की ओर से रात में ही मामले की एफआईआर दर्ज करा दी गई थी।

जबकि सचिव ने अगले दिन सिविल लाइंस पुलिस को तहरीर देकर मामला दर्ज कराया। दोनों के पास एक ही नंबर से कॉल आई थी और फोन करने वाले ने खुद को शाकिर अली बताया था। मामला हाई प्रोफाइल होने के कारण पुलिस तुरंत सक्रिय हुई।
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जांच पड़ताल में पता चला कि जिस नंबर से दोनों अफसरों के पास कॉल आई, उसकी लोकेशन दिल्ली में हैं। ऐसे में शाम को ही सिविल लाइंस थाने की एक टीम रवाना कर दी गई। रविवार सुबह टीम दिल्ली पहुंची और सुरागरशी में जुट गई। दोपहर में त्रिलोकपुरी पहुंचकर पुलिस ने आरोपी को दबोचा तो वह माफी मांगने लगा। पूछताछ मेें उसने खुद का नाम शाकिर अली बताया।

साथ ही कहा कि काफी प्रयास के बाद भी उन्नाव के प्राइमरी स्कूल में शिक्षिका के पद पर तैनात उसकी बहन का ट्रांसफर नहीं हो रहा था। इसी के लिए उसने दोनों अफसरों के पास फोन किया था। पुलिस ने बताया कि आरोपी दोनों पैरों से दिव्यांग है। सीओ वृजनारायण सिंह ने बताया कि जिन धाराओं में मामला दर्ज हुआ, उनमें गिरफ्तारी का प्रावधान नहीं है। ऐसे में नोटिस तामीला व बयान दर्ज करने के बाद टीम लौट आई है। आगे विधिक कार्रवाई की जाएगी।

खुद को बताता रहा अलीगढ़ का भाजपा नेता
सूत्रों का कहना है कि आरोपी से जब पूछा गया कि उसने दोनों अफसरों को फोन पर झूठा नाम क्यों बताया, तो उसने कहा कि वह अलीगढ़ का रहने वाला है। काम जल्द हो जाए, इसके लिए उसने ख्ुाद को अलीगढ़ भाजपा का महामंत्री बताया। पुलिस का कहना है कि उसके दिए गए बयान के संबंध में जांच की जा रही है कि वह कितना सही बोल रहा है।

फिलहाल यह नहीं पता चल सका है कि वह महिला कौन थी, जिसके नाम सिम जारी हुआ। दरअसल जांच पड़ताल में पता चला था कि जिस नंबर से दोनों अफसरों के पास फोन आया, वह एक महिला के नाम से जारी कराया गया था।

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