आरोप लगाया गया कि अभियुक्त ने पीड़िता को तमंचा दिखाकर उसके साथ दुराचार किया। बताया गया कि घटना 23 मई 2013 की है। पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल कराया, जिसमें दुराचार का कोई साक्ष्य नहीं मिला। इस पर पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी। पीड़िता की ओर से प्रोटेस्ट अर्जी दाखिल की गई जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए मामले का ट्रायल शुरू किया और कृष्णकांत को 15 वर्ष कैद की सजा सुनाई।
अपीलार्थी की ओर से कहा गया कि पीड़िता बालिग है। मेडिकल परीक्षण में दुराचार का कोई साक्ष्य नहीं मिला है। याची और पीड़िता एक ही गांव के रहने वाले हैं। दोनों परिवारों के बीच रंजिश है। इसके कारण याची को फर्जी फंसाया गया है। । न्यायालय ने सेशन न्यायालय की ओर से सुनाई गई सजा रद्द करते हुए कृष्णकांत को बरी करने का आदेश दिया।