इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पत्नी की ओर से पति के खिलाफ अदालत को गुमराह करने के लगाए गए आरोपों की प्रारंभिक न्यायिक जांच महानिबंधक को सौंपते हुए एक माह में रिपोर्ट तलब की है। साथ ही पति को दी गई अंतरिम राहत के आदेश को वापस ले लेते हुए उसकी विदेश यात्रा पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो यह न्याय में बाधा डालने और फर्जीवाड़े का गंभीर मामला होगा। लिहाजा मामले के मूल अभिलेख सुरक्षित रखे जाएं।
यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव की अदालत ने आजमगढ़ निवासी अकिंता प्रियदर्शिनी की याचिका पर दिया है। याची ने आरोप लगाया कि उनके पति अर्पण सक्सेना ने पासपोर्ट संबंधी शर्तों में ढील पाने के लिए अदालत के समक्ष जाली दस्तावेज पेश किए। हलफनामे में हेरफेर की और फर्जी हस्ताक्षरों का प्रयोग किया। साथ ही प्रति शपथपत्र के पन्नों को गायब करने और अनधिकृत पन्ने जोड़ने जैसे आरोप भी लगाए गए।
हाईकोर्ट ने पाया कि 26 मार्च 2025 को दिए गए आदेश में जिस प्रति शपथपत्र पर भरोसा किया गया था, वह बिना शपथ का था और उस पर अदालत की मार्किंग भी थी। इसे अदालत ने गंभीर अनियमितता और न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग माना। लिहाजा कोर्ट ने सात और 26 मार्च के अपने पूर्व आदेशों को वापस लेते हुए अर्पण सक्सेना को पासपोर्ट जमा करने का आदेश दिया है। साथ ही बिना अनुमति देश छोड़ने पर रोक लगा दी। मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर 2025 को होगी।