केंद्रीय और राज्यकर्मियों के खाते में वेतन पहुंच गया है, लेकिन ज्यादातर कर्मचारियों के अब तक हाथ नहीं आया। एजी ऑफिस, सीडीए पेंशन, कलक्ट्रेट, विकास भवन समेत तमाम सरकारी दफ्तरों के कर्मचारी महीने की शुरुआत में पाई-पाई को तरस रहे हैं। वहीं, पेंशनरों को भी अपने पैसे के लिए परेशान होना पड़ रहा है। वे भी पेंशन के लिए लंबी कतार में खड़े होने को मजबूर हैं। इससे जिले में ही तकरीबन डेढ़ लाख कर्मचारी एवं पेंशनर्स प्रभावित हैं।
एटीएम से एक साथ ढाई हजार रुपये से अधिक नहीं निकल सकते। 90 फीसदी एटीएम में 100 के नोट नहीं हैं। ऐसे में लोगों को एटीएम से सिर्फ दो हजार रुपये ही मिल रहे हैं। वहीं, पेपर देने वाले हॉकर, काम वाली, दूध वाले ने अपने पैसे के लिए तकादा करना शुरू कर दिया है। अपार्टमेंट में रहने वालों को सोसाइटी के लिए मासिक शुल्क भी जमा करना है। अभिभावकों को अपने बच्चों की स्कूल बस का शुल्क देना है। महीने का राशन भी खरीदना है। ऐसे तमाम खर्च हैं, जिनके लिए लोगों को रुपये की सख्त जरूरत है। ये काम तीन-चार हजार, यहां तक कि दस हजार में भी पूरे नहीं होने वाले। हालांकि वेतन और पेंशन जारी होने के बाद बैंकों में कैश तो पहुंचा लेकिन वितरण के लिए वह काफी नहीं है।
कहीं चार हजार तो कहीं अधिकतम दस हजार रुपये ही खाते से निकल पा रहे हैं। कर्मचारी और पेंशनर्स परेशान हैं। राजकीय सेवानिवृत्त/पेंशनर एसोसिएशन के प्रांतीय उपाध्यक्ष हनुमान प्रसाद श्रीवास्तव और गवर्नमेंट पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष आरएस वर्मा का कहना है कि खाते में पेंशन पहुंचने का मोबाइल में मैसेज आ गया है, लेकिन यह रकम खाते से बाहर नहीं आ पा रही है। बैंक महज चार से दस हजार रुपये ही कैश दे रहे हैं। एटीएम से भी ढाई हजार रुपये से अधिक नहीं निकल सकता जबकि पेंशनरों के जीवन यापन का एकमात्र जरिया उनकी पेंशन है। उन्होंने मांग की है कि सभी बैंक पेंशनरों के लिए अलग से काउंटर की व्यवस्था करें।
उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ की बृहस्पतिवार को हुई बैठक में कर्मचारियों ने मांग उठाई कि केंद्र एवं राज्यकर्मियों को उनके वेतन का एकमुश्त भुगतान किया जाए। खाते से रकम न निकल पाने के कारण कर्मचारियों के लिए घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। कर्मचारियाें ने कहा कि उन्हें बैंकों में फंसा वेतन नहीं मिला तो बैंकों का घेराव करेंगे। बैठक में कड़ेदीन यादव, अवधेश यादव, हरी मोहन, सुरेश विद्यार्थी आदि मौजूद रहे।
पांच सौ और एक हजार के नोट बंद किए जाने के खिलाफ समाजवादी मजदूर सभा के लोगों ने जिलाध्यक्ष दिवाकर सिंह यादव के नेतृत्व में कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किया और जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन प्रेषित किया। मजदूरों का कहना है कि नोटबंदी के कारण उन्हें मजदूरी नहीं मिल रही है। रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। उनकी मांग है कि स्थिति सामान्य होने तक पुराने नोटों के चलन की अनुमति दी जाए।