Aadhar information cannot be given on the possibility of misuse
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि आधार कार्ड की सूचनाएं गोपनीय होती हैं और सिर्फ इसके दुरुपयोग की आशंका पर इन सूचनाओं के खुलासे की अनुमति नहीं दी जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि आधार की सूचनाएं निजी होती हैं, जो निजता के अधिकार के अंतर्गत मूल अधिकार है। यदि आधार कार्ड का दुरुपयोग हुआ है तो याची आधार कानून की धारा 47 के तहत दंडनीय अपराध होने की सक्षम न्यायालय से शिकायत कर सकता है।
यह आदेश न्यायमूर्ति शशिकांत गुप्ता तथा न्यायमूर्ति एस एस शमशेरी की खंडपीठ ने ग्राम परसोदा, लोनी, गाजियाबाद के भारत भूषण थापर की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता अनुराग खन्ना और भारत सरकार के अधिवक्ता सभाजीत सिंह ने बहस की।
याची अधिवक्ता का कहना था कि जय प्रकाश गुप्ता और किरण बेदी गुप्ता ने शालीमार गार्डन कालोनी में 1981 में प्लॉट खरीदा। इनकी मृत्यु के बाद बड़े बेटे ने याची की मां रक्षा देवी थापर और बहन मधु थापर को 1990 में यह जमीन बेच दी। प्रमोद कुमार सिंह चौहान ने इसी जमीन पर जबरन कब्जे की कोशिश की, जिसकी प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
इस बीच चौहान ने जय प्रकाश गुप्ता और किरण देवी गुप्ता जिनकी मृत्यु हो चुकी है, के आधार कार्ड को दूसरे लोगों के नाम बदलकर जमीन रेखा अग्रवाल के नाम बेच दी। इस धोखाधड़ी की याची ने दो मार्च 15 को पीके सिंह चौहान, अनिल अग्रवाल, रेखा अग्रवाल, सुरेश चन्द्र मित्तल, दिशा श्रीवास्तव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। उसी नंबर से जारी आधार कार्ड को रोशन आरा को किरण देवी गुप्ता तथा अशोक को जयप्रकाश गुप्ता बताकर कार्ड जारी करा लिया गया।
इस तरह से मरे हुए लोगों के आधार कार्ड पर दो लोगों के नाम बदलवा कर जमीन का बैनामा करा लिया गया, जिस पर यह याचिका दाखिल की गई थी । कोर्ट से आधार कार्ड की पत्रावली तलब करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा सक्षम न्यायालय में दंडनीय अपराध को लेकर इस्तगासा दायर किया जा सकता है। केवल शिकायत पर हाईकोर्ट आधार की सूचना देने की अनुमति नहीं दे सकता।