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Prayagraj : एक स्कैन और खुल जाएगा पेड़ों का इतिहास, इलाहाबाद विश्वविद्यालय की अनोखी पहल

Sun, 19 Jul 2026 05:39 PM IST
विनोद सिंह पुष्पा कुमारी, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने ऐतिहासिक और हरित परिसर को डिजिटल तकनीक से जोड़ते हुए एक अभिनव पहल की है। विवि के विज्ञान और कला संकाय परिसर में सभी पेड़ों पर क्यूआर कोड आधारित स्कैनर लगाए गए हैं।
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पेड़ों पर लगाया गया स्कैनर। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने ऐतिहासिक और हरित परिसर को डिजिटल तकनीक से जोड़ते हुए एक अभिनव पहल की है। विवि के विज्ञान और कला संकाय परिसर में सभी पेड़ों पर क्यूआर कोड आधारित स्कैनर लगाए गए हैं। अब छात्र, शोधार्थी, शिक्षक और आगंतुक अपने मोबाइल फोन से क्यूआर कोड स्कैन कर संबंधित पेड़ की संपूर्ण जानकारी कुछ ही सेकंड में प्राप्त कर सकेंगे। यह पहल विवि में पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता के प्रति जागरूकता और डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई है।

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अब पेड़ों की पहचान के लिए किसी विशेषज्ञ या पुस्तक की आवश्यकता नहीं होगी। क्यूआर कोड स्कैन करते ही संबंधित पेड़ की विस्तृत प्रोफाइल स्क्रीन पर खुल जाएगी। इसमें स्थानीय नाम, वैज्ञानिक नाम, वनस्पति परिवार, उत्पत्ति, औषधीय गुण, पर्यावरणीय उपयोगिता, आर्थिक महत्व समेत अन्य रोचक जानकारियां उपलब्ध होंगी।

परिसर में आम, टीक (सागौन), गुलमोहर, फाइकस इलास्टिका (रबर ट्री), पीपल, महानीम सहित विभिन्न पेड़ों पर क्यूआर कोड लगाए गए हैं। हर वृक्ष की जानकारी वैज्ञानिक आधार पर तैयार की गई है। इस व्यवस्था से वनस्पति विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान और भूगोल जैसे विषयों के विद्यार्थियों को विशेष लाभ मिलेगा। संवाद
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परिसर में मौजूद वृक्ष केवल हरित संपदा नहीं बल्कि ज्ञान और जैव विविधता के अहम स्रोत हैं। क्यूआर कोड आधारित यह पहल विद्यार्थियों, शोधार्थियों और सामान्य लोगों को पेड़ों की वैज्ञानिक, औषधीय व पर्यावरणीय जानकारी सहज रूप से उपलब्ध कराएगी। इससे पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और तकनीक आधारित शिक्षण को भी नया आयाम मिलेगा। - प्रो. जया कपूर, पीआरओ

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