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Prayagraj : दो साल से रेबीज से लड़ रहा सात साल का बच्चा, नली से पी रहा दूध व जूस

Fri, 27 Mar 2026 06:59 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

कहते हैं कि अगर रेबीज हो जाए तो पीड़ित का जिंदा बचना किसी चमत्कार से कम नहीं है। ऐसा ही मामला प्रयागराज के मंसूराबाद इलाके में सामने आया है, जहां दो साल से सात वर्षीय बच्चा रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी से जंग लड़ रहा है।
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रेबीज से पीड़ित सात साल का ताबीज। - फोटो : संवाद।
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विस्तार
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कहते हैं कि अगर रेबीज हो जाए तो पीड़ित का जिंदा बचना किसी चमत्कार से कम नहीं है। ऐसा ही मामला प्रयागराज के मंसूराबाद इलाके में सामने आया है, जहां दो साल से सात वर्षीय बच्चा रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी से जंग लड़ रहा है। बच्चे का इलाज कर रहे न्यूरो सर्जन डॉ. प्रकाश खेतान का दावा है कि यह विश्व का ऐसा चौथा मामला है, जहां रेबीज होने के बाद भी पीड़ित जिंदा है।
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मंसूराबाद निवासी उबैद खान के बेटे ताबीज को दो साल पहले यानी छह जून 2024 को कुत्ते ने काट लिया था। परिजनों ने उसे रेबीज का टीका लगवाना शुरू किया। हालांकि, करीब 20 दिन बाद बच्चे को बुखार आने लगा। इसके बाद परिजनों ने शहर के कई निजी चिकित्सालयों में इलाज कराया।

इस बीच 10 जुलाई को परिजन उसे लखनऊ ले गए, जहां कुछ दिन बाद ताबीज कोमा में चला गया। वहीं, चिकित्सकों ने भी जवाब दे दिया। इस पर परिजन बच्चे को वापस घर ले आए। इसके बाद उन्होंने न्यूरो सर्जन डॉ. प्रकाश खेतान से संपर्क किया, जिन्होंने उसका इलाज शुरू किया। इस दौरान उसे घर पर ही रखा गया।
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वहीं, करीब चार महीने बाद ताबीज ने अपनी आंखें खोलीं। धीरे-धीरे उसकी हालत में सुधार होने लगा। वर्तमान में वह कुछ बोल तो नहीं पाता है, लेकिन सब कुछ देखता है और समझने की कोशिश भी करता है। मां सबीना ताबीज को रोजाना चार से पांच चम्मच पानी देती हैं। बच्चे की नाक में लगी नली से उसे दाल, नारियल का पानी, दूध व जूस दिया जा रहा है। ताबीज हाथ-पैर भी हिलाता है और खुद से एक तरफ करवट भी लेता है।
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यह है रेबीज

रेबीज एक अत्यंत घातक वायरल संक्रमण है, जो मुख्य रूप से संक्रमित जानवरों (कुत्ता, बिल्ली, बंदर) के काटने, खरोंचने या लार के माध्यम से फैलता है। यह सीधे केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी) पर हमला करता है। लक्षण दिखने के बाद यह लगभग 100 फीसदी जानलेवा है, लेकिन काटने के तुरंत बाद वैक्सीन लगवाने से इससे बचा जा सकता है।

ये हैं लक्षण

1. बुखार, थकान, गले में खराश, उल्टी, मांसपेशियों में दर्द और काटने वाली जगह पर जलन या झुनझुनाहट।
2. पानी निगलने में कठिनाई के कारण पानी से अत्यधिक डर लगना।
3. मुंह से बहुत ज्यादा लार आना।
4. आक्रामकता, चिंता, भ्रम और बेचैनी।
5. सांस लेने और निगलने में समस्या।
6. शरीर के अंगों का काम न करना या सुन्न होना।

रेबीज होने के बाद इंसान का बचना लगभग नामुमकिन होता है। अब तक विश्व में सिर्फ तीन लोग रेबीज होने के बाद जिंदा बचे हैं। यह चौथा मामला है, अभी तक मैंने इसे फाइल नहीं किया है। बच्चा पहले से ठीक है और उसकी लंबाई भी दो से तीन इंच बढ़ी है। - डॉ. प्रकाश खेतान, न्यूरो सर्जन

लखनऊ से जवाब मिलने के बाद हमने उम्मीद छोड़ दी थी लेकिन डॉक्टर साहब ने चमत्कार कर दिखाया। बेटा पहले से काफी ठीक है। वह हम लोगों को आंख खोलकर देखता है और बीच-बीच में अपने हाथ-पैर हिलाने के साथ करवट भी लेता है। - उबैद खान, पिता, मंसूराबाद
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