औद्योगिक क्षेत्र के हल्दी कला में बारावफात का जुलूस निकालते मुस्लिम समुदाय के लोग
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राम मंदिर पर फैसला आने के बाद संगमनगरी ने बारावफात के मौके पर संयम, सौहार्द और भाईचारे की मिसाल पेश की। चाहे करेली, मीरापुर व कल्याणी देवी की चाय की दुकानों की अड़ियां हों या फिर बारावफात के जुलूस। हिंदु-मुसलमानों में एक साथ सद्भाव का संदेश देते हुए खुशियों का इजहार किया। कल्याणी देवी में बारावफात के जुलूसों का हिंदुओं ने भी स्वागत किया तो चाय की अड़ियों पर मुसलमान भी सुप्रीम कोर्ट के राम मंदिर फैसले की सराहना करते नजर आए।
राम मंदिर पर फैसले बाद बारावफात पर रसूल की आमद की खुशी में निकाले गए जुलूस में मजहबी एकता पर आधारित हिंदुस्तान का नक्शा बनाया गया। ख्वाजा गरीब नवाज के साथ हिंदुस्तान का नक्शा बनाकर ‘हम एक हैं’ का संदेश दिया गया।
कल्याणी देवी मंदिर के पास बाबूलाल चाय वाले की दुकान पर फिर अटाला व्यापार मंडल के अध्यक्ष फैयाज अहमद व अकरम, नसीम सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चाय की चुस्कियों के साथ सराहते मिले। पूछते ही फैयाज बोल पड़े कि हिंदु-मुसलमान दोनों के हक में बहुत ही अच्छा हुआ। हमेशा-हमेशा के लिए सिर का बोझ तो उतरा ही, फैसले में हर किसी की भावना का आदर किया गया है। इसी कल्याणी देवी मंदिर के पास ही मंच लगाकर बारावफात के जुलूसों का स्वागत फैयाज, नईम अहमद के साथ पवन द्विवेदी, पंकज द्विवेदी, अमिताभ तिवारी, विभूति नारायण सिंह व अन्य नागरिक कर रहे थे।
बारावफात पर आकर्षक सजावट करने वाली अंजुमनों को पार्षद अखिेलश सिंह, सरदार अजीत सिंह व कादिर भाई ने मिलकर सम्मानित भी किया। जामा मस्जिद के नीचे लंबे समय से कारोबार करने वाले संजय गुप्ता कहते हैं कि यह सद्भाव और अमन का शहर है। बारावफात के मौकेपर हिंदू-मुसलमानों की ओर से आपसी सौहार्द के लिए पेश किए गए उदाहरण से हर किसी को सीख लेनी चाहिए।