इलाहाबाद। प्रदेश सरकार वाहनों के रजिस्ट्रेशन के लिए एक मई यानी शुक्रवार से नई व्यवस्था लागू करने का जा रही है। इसमें वाहन शोरूम मालिकों को लूट की खुली छूट मिल जाएगी। संभागीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) कार्यालय में दलालों की भी बल्ले-बल्ले होगी। नई व्यवस्था में किसी भी वाहन का रजिस्ट्रेशन उनके मालिक स्वयं नहीं करा सकेंगे, बल्कि यह काम शोरूम संचालकों को कराना होगा। इसके लिए सरकार ने अलग से फीस भी निर्धारित कर दी है।
अभी तक कोई भी वाहन खरीदने पर वाहन स्वामी स्वयं आरटीओ कार्यालय जाकर रजिस्ट्रेशन करा लेते थे। इसमें खर्च कम आता था। शोरूमों की ओर से भी यह सुविधा दी जाती है लेकिन इसके बदले चारपहिया वाहनों के रजिस्ट्रेशन के लिए 1500 से 2000 रुपये तक अतिरिक्त और दोपहिया वाहन के लिए 500 से 800 रुपये तक अतिरिक्त ले लेते हैं। इस रकम में दलाल से लेकर कर्मचारी और अधिकारी तक का कमीशन सेट रहता है। महंगी गाड़ियां खरीदने वाले आरटीओ कार्यालय का चक्कर लगाने से बचने के लिए यह रकम खर्च कर देते हैं लेकिन काफी लोग ऐसे हैं जो वाहन के रजिस्ट्रेशन के नाम पर अतिरिक्त रकम खर्च नहीं करना चाहते सो खुद ही कार्यालय जाकर रजिस्ट्रेशन कराते हैं।
अब एक मई से वाहनों के खरीदार सीधे आरटीओ कार्यालय जाकर रजिस्ट्रेशन नहीं करा सकेंगे। सरकार ने यह व्यवस्था डीलर्स प्वाइंट पर कर दी है। इसके तहत दोपहिया, चारपहिया वाहन खरीदने वालों को शोरूम में रजिस्ट्रेशन शुल्क जमा करना होगा। इसके साथ सर्विस टैक्स से रूप में 200 रुपये अतिरिक्त देने होंगे। रजिस्ट्रेशन होने के बाद शोरूम से ही वाहन मालिक को आरसी मिलेगी। परिवहन आयुक्त की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि शोरूम में रजिस्ट्रेशन के नाम पर अधिक रकम ली जाती है तो इसकी शिकायत आरटीओ से की जा सकती है। यहां सवाल यह है कि तकरीबन सभी शोरूम पहले से ही रजिस्ट्रेशन के नाम पर काफी अधिक धन वसूल रहे हैं, जिसकी जानकारी आरटीओ को भी है लेकिन उन शोरूमों के खिलाफ आज तक कुछ नहीं हुआ। ऐसे में सरकार की ओर से नई व्यवस्था लागू होने के बाद शोरूम मालिकों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी, कहना मुश्किल है।