सावन के पहले सोमवार की शाम जिले की अनोखी परंपरा में से एक गहरेबाजी अरैल बांध रोड पर शुरू हुई। इसमें शहर के 18 से अधिक गहरेबाज अपने घोड़ों के साथ पहुंचे। गहरेबाजी में कदमताल के साथ रफ्तार का अनूठा संगम देखने को मिला।
गहरेबाज विष्णु महाराज और गोलू महाराज ने बताया कि यह परंपरा कई वर्ष पुरानी है। गहरेबाजी में रोमांच, जोश और जुनून देखने को मिलता है। इसमें शामिल होने वाले घोड़ों को साल भर अच्छी खुराक दिए जाता है। इसकी शुरुआत कीडगंज निवासी महावीर महाराज ने की थी। इसके बाद उनके बेटे भैया महाराज ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया।
इसमें मुस्लिम गहरेबाज भी शामिल होते हैं। प्रतियोगिता में कीडगंज के विष्णु महाराज, भैया महाराज, मालवीय नगर के गोलू महाराज, अटाला के राजू, मालवीय नगर के मोहित, करेली के बब्ली, अहमद, असरावल कला के सत्तार हुसैन, कीडगंज के बब्बन आदि ने प्रतिभाग किया।