इलाहाबाद। नगर निगम में नामित पार्षदों को वोट देने का अधिकार नहीं है। हाईकोर्ट ने नामित पार्षदों को मताधिकार देने संबंधी सरकार के संशोधन को असंवैधानिक करार देते हुए रद कर दिया है। अदालत के इस फैसले से नगर निगम सदन की बैठक में मात्र निर्वाचित सभासद ही मतदान कर सकेंगे। योगेश मित्तल द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायाधीश डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल की खंडपीठ ने कहा कि संविधान के प्रावधानों के विपरीत कोई कानून नहीं बनाया जा सकता है। याचिका में म्युनिस्पलटीज एक्ट की धारा 9(1)(डी) में परंतुक जोड़ कर नामित पार्षदों को मतदान का अधिकार दिए जाने को चुनौती दी गई। याची का कहना था कि यह संशोधन संविधान के अनुच्छेद 243- आर के विपरीत है। संवैधानिक व्यवस्था नामित पार्षदों को मताधिकार दिए जाने के खिलाफ है। खंडपीठ ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए कहा कि एक्ट में किया गया संशोधन संवैधानिक नहीं है, इसलिए इसे जारी नहीं रखा जा सकता है।