इलाहाबाद। चिकित्सा संस्थानों द्वारा मेडिकल कचरे (बायोमेडिकल वेस्ट) के प्रबंधन और निस्तारण को लेकर हाईकोर्ट गंभीर है। अदालत ने तीन मई 2012 में सरकार को निर्देश दिया था कि मेडिकल कचरे के प्रबंधन और निस्तारण के लिए बने बायो मेडिकल वेस्ट(प्रबंधन व निस्तारण) नियमावली 1998 का अनुपालन किया जाए। निर्देश इलाहाबाद जिले के संबंध में था मगर अदालत ने इस समस्या की गंभीरता को देखते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी रिपोर्ट तलब की थी। अब आगरा के सबी हैदर जाफरी द्वारा एक अन्य जनहित याचिका में यही मामला उठाया गया है।
याचिका में बताया गया कि प्रदेश की 3125 मेडिकल यूनिटों में मात्र 998 में मेडिकल कचरे के प्रबंधन और निस्तारण की व्यवस्था है। याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायाधीश डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल की खंडपीठ ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और प्रदेश सरकार से इस मामले में अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है। खंडपीठ ने प्रदेश सरकार को सारणी के माध्यम से बताने के लिए कहा है कि नियमावली 1998 के पालन हेतु अधिकारियों ने अब तक क्या कदम उठाए हैं। विशेषकर आगरा जिले में कितने स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले संस्थान नियमों का पालन कर रहे हैं। सरकार और प्रदूषण बोर्ड नियमावली का पालन कराने के लिए क्या कदम उठाने जा रहा है। खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस याचिका के लंबित रहने से प्रदेश सरकार द्वारा कोई निर्णय लेने में बाधा नहीं आएगी।पीठ ने मौजूदा याचिका को पूर्व की जनहित याचिका के साथ संबद्ध करते हुए एक साथ सुनवाई का आदेश दिया है। इससे पूर्व हाईकोर्ट ने नियमावली के पालन हेतु एक सलाहकार बोर्ड गठित करने और जिला स्तरीय निगरानी समिति बनाने का निर्देश दिया था। इन आदेशों के अनुपालन की जानकारी भी मांगी है।