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पत्नी के हत्यारे पति को आजीवन कारावास

Sun, 24 Aug 2014 05:30 AM IST
Allahabad
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। पत्नी के सिर पर चोट पहुंचाकर उसकी हत्या करने के आरोपी पति को अदालत ने उम्रकैद और दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। सजा का आदेश अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश राघवेंद्र ने सुनाया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने अभियुक्तों के खिलाफ साक्ष्य प्रस्तुत किए। इसी मामले में अदालत ने मृतका के जेठ-जेठानी और ससुर को दहेज उत्पीड़न और हत्या के आरोप से मुक्त कर दिया है। मुकदमे में अभियोजन के सभी गवाह अपने बयान से पलट गए, मगर अदालत ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर पति को हत्या का दोषी करार दिया है।
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घटना मऊआइमा थाने के ग्राम वली का पुरा गांव की 22 जुलाई 2010 की है। गांव के इंद्रप्रकाश यादव की शादी छह मई 2009 को होलागढ़ के सरायनंदन गांव निवासी रामसुंदर यादव की भतीजी सुनीता के साथ हुई थी। घटना के 14 माह बाद ही 22 जुलाई की रात सुनीता की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। मायके वालों ने दहेज के लिए प्रताड़ित करने और जलाकर मार डालने का आरोप लगाते हुए पति इंद्रप्रकाश, ससुर भाई लाल यादव, जेठ ज्ञान प्रकाश यादव और जेठानी कुसुमदेवी के खिलाफ दहेज हत्या और दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि सुनीता की मृत्यु सिर पर आई चोट की वजह से हुई और मरने के बाद उसे जलाया गया। जलने से आई चोटें मृत्यु के बाद आई थी। बचाव पक्ष ने अपनी जिरह में कहा कि सुनीता ने खुद आग लगाई फिर बचने के भागी जिससे वह किसी चीज से टकरा गई और सिर में चोट आने से उसकी मृत्यु हो गई।
बचाव पक्ष की इस थ्योरी को डॉक्टर के बयान से गलत साबित कर दिया। डॉक्टर के मुताबिक यदि आग मृत्यु पूर्व लगी होती तो मृतक के फेफड़ों और श्वास नली में कार्बन के अंश अवश्य मिलते, मगर ऐसा नहीं था। इसका अर्थ है कि आग लगने से पूर्व उसकी मृत्यु हो चुकी थी। अभियोजन की ओर से पेश किए गए साक्षी वादी मुकदमा राजपत यादव, मृतका की मां और चाची आदि सभी गवाह अपने बयान से मुकर गए। सभी ने दहेज प्रताड़ना और हत्या किए जाने की बात से इनकार किया। अदालत ने दहेज उत्पीड़न और दहेज हत्या के आरोप से सभी को बरी कर दिया, मगर पति इंद्रप्रकाश को हत्या करने का दोषी करार देते हुए उम्रकैद और दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
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