इलाहाबाद। सेंट मेरी कान्वेंट (एसएमसी) में लगातार दूसरे दिन छात्राओं का उत्पीड़न किया गया। छात्राओं को विद्यालय की असेम्बली से दूर रखकर उन्हें अलग लाइन में खड़ा किया गया। हद तो तब हो गई जब असेम्बली के अंत में होने वाले राष्ट्रगान में भी छात्राओं को भाग लेने से रोक दिया गया। इन छात्राओं को असेम्बली के बाद भी क्लासरूम के बाहर ही खड़ा रखा गया। जब इन छात्राओं के अभिभावक स्कूल पहुंचे और उन्होंने विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ शोर शराबा किया तब छात्राओं को थोड़ी राहत मिली। उन्हें फटकार लगाने और नाम काटने की धमकी के बाद क्लासरूम में जाने दिया गया। इन छात्राओं के अभिभावकों ने उत्पीड़न की शिकायत राष्ट्रीय बाल आयोग से करने की धमकी दी है। अभिभावकों ने अमर उजाला को फोन करके जानकारी दी, उनके आग्रह पर हम पहचान गोपनीय रख रहे हैं। छात्राओं और अभिभावकों की लगातार शिकायत के बाद भी स्कूल की प्रधानाचार्या सिस्टर मैरीयट ने इन खबरों को गलत बताया है।
बृहस्पतिवार को विद्यालय की कई छात्राओं को शहर के एक कोचिंग संस्थान में पढ़ाई करने तथा उन्हें अपनी स्कूल डायरी की फोटोकॉपी देने के दोष में परीक्षा से रोक दिया गया और क्लासरूम से बाहर धूप में खड़ा रखा गया था। इन छात्राओं को अपने अभिभावकों के साथ शुक्रवार को आने को कहा गया था। शुक्रवार सुबह जब छात्राएं स्कूल पहुंची तो उन्हें असेम्बली में अलग करके खड़ा कर दिया गया। असेम्बली के दौरान स्कूल परिसर में मौजूद एक अभिभावक यह सब कुछ देख रहा था। उसने अमर उजाला को बताया कि छात्राओं को किसी अन्य वजह से नहीं बल्कि उन्हें एक दिन पहले दंडित करने की घटना के क्रम में अलग से लाइन में खड़ा किया गया। बाद में कई अभिभावकों ने अमर उजाला को फोन करके बताया कि उनकी बच्चियों को धमकी दी गई है। अमर उजाला ने अभिभावकों के आग्रह पर उनकी बेटियों के कैरियर को ध्यान में रखते हुए नाम गोपनीय रखा है। इस घटना के बारे में एसएमसी की प्रधानाचार्या सिस्टर मैरीयट का कहना है कि अभिभावकों के आरोप गलत हैं। उन्होंने कहा कि कुछ अभिभावक स्कूल की छवि खराब कर रहे हैं।