इलाहाबाद (ब्यूरो)। हाईकोर्ट ने जौनपुर के मछली शहर से सांसद रामसुचित का चुनाव रद करने की मांग खारिज कर दी है। इस मामले को लेकर दाखिल याचिका में कहा गया था कि रामसुचित ने अनुसूचित जाति का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर मछली शहर सुरक्षित सीट से चुनाव लड़ा जबकि वह पिछड़ी जाति के हैं और मूल रूप से बस्ती के रहने वाले हैं। इसके बावजूद जाति प्रमाणपत्र दिल्ली से बनवाया गया। याचिका में उनको सांसद के तौर पर काम करने से रोकने की मांग की गई थी।
याची दिलीप राय बलवानी का कहना था कि उसने इसकी शिकायत चुनाव अधिकारी से की थी मगर उन्होंने यह कहते हुए उनकी शिकायत नामंजूर कर दी कि उनको जाति प्रमाणपत्र की वैधता निर्धारित करने का अधिकार नहीं है। याचिका के विरोध में कहा गया कि चुनाव के बाद इस प्रकार की याचिका पोषणीय नहीं है। याची को यह मामला चुनाव याचिका में उठाना चाहिए। मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता और न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी की खंडपीठ ने याचिका पोषणीय नहीं होने के आधार पर इसे खारिज कर दिया।