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शुरू नहीं हुई पढ़ाई, कैंपस में हर तरफ बस ‘लड़ाई’

Wed, 23 Jul 2014 05:30 AM IST
Allahabad
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इलाहाबाद। कई महत्वपूर्ण पदों पर बैठे एक वरिष्ठ प्रोफेसर अक्सर कहा करते हैं कि ‘पहले मैं भगवान में बहुत विश्वास नहीं करता था लेकिन विश्वविद्यालय को देखकर मानने लगा हूं कि भगवान हैं। तभी यह विश्वविद्यालय चल रहा है।’ इलाहाबाद विश्वविद्यालय को लेकर यह निराशा सबकी है। नया सत्र शुरू हो चुका है लेकिन परिसर में छात्र-छात्राओं की चहल-पहल की जगह नारों की गूंज सुनाई दे रही है। पूरे पखवाड़ा ‘पूरब का यह ऑक्सफोर्ड’ सियासत का अखाड़ा बन रहा। यह सिलसिला अब भी जारी है। विश्वविद्यालय के साथ मंगलवार को कालेजों के कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल हो गए तो छात्रसंघ की सियासत में बढ़त बनाने में जुटे छात्र नेताओं ने भी मोर्चा खोल दिया है। खास यह कि इस हालात में भी कुलपति प्रोफेसर अनिल कुमार सिंह एक बार फिर ‘मिस्टर इंडिया’ की भूमिका में हैं। समय-समय पर गायब हो जाने वाले कुलपति की तलाश के लिए सैकड़ों छात्राें ने मंगलवार को कर्नलगंज थाने में गुहार लगाई। विश्वविद्यालय की जो स्थिति है उसमें सभी को अब सिर्फ मानव संसाधन विकास मंत्रालय से उम्मीद है। इसी उम्मीद में कार्यपरिषद के सदस्य, छात्रों का एक वर्ग दिल्ली में डेरा डाले हुए है।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों ने कर्नलगंज थाना में कुलपति की गुमशुदगी की तहरीर दी है। वे रिपोर्ट लिखकर कुलपति की तलाश करने की मांग कर रहे थे। छात्र कुलपति के साथ किसी अनहोनी तथा जानमाल को खतरा होने की आशंका जता रहे थे। छात्रों का यह हाई प्रोफाइल ड्रामा एक घंटे से भी अधिक समय तक चला। छात्र सीनेट परिसर से जुलूस बनाकर थाना पहुंचे। इससे पहले उन्होंने वीसी की खोज में विज्ञान संकाय, प्रवेश भवन परिसर में भी जुलूस निकाला। छात्रों ने कुलपति से भी अपील की है कि ‘कुलपतिजी जहां भी हों वापस आ जाएं। कर्मचारी और छात्र दर बदर की ठोक खा रहे हैं। आप तत्काल कार्यालय आकर उनकी समस्याओं का निराकरण करें।’ तहरीर देने वालों में अमरेंदु सिंह, श्याम कृष्ण पांडेय, श्याम प्रकाश पांडेय, शेष नारायण ओझा, देवमणि मिश्रा आदि शामिल रहे।
रिजल्ट घोषित करने, कक्षाएं शुरू करने समेत 14 सूत्रीय मांग को लेकर छात्र नेताओं अंबुज मिश्रा, विवेक वर्मा और अभय सिंह का अनशन दूसरे दिन मंगलवार को भी जारी रहा। उनके समर्थन में विजय मिश्रा, पूर्व छात्रसंघ महामंत्री अभिषेक सिंह माइकल, शेषनारायण ओझा, चंद्रजीत यादव, रामकृष्ण पांडेय, अविनाश दुबे आदि अनशन स्थल पर पहुंचे। छात्रों में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से वार्ता के लिए किसी प्रकार की पहल नहीं किए जाने पर नाराजगी रही। उन्होंने कुलपति तथा अन्य अफसरों के खिलाफ जमकर नारेबाजी। विश्वविद्यालय की स्थिति को लेकर माइकल के नेतृत्व में छात्रों के एक गुट ने रजिस्ट्रार प्रोफेसर बीपी सिंह का उनके आवास पर घेराव भी किया। छात्रों ने उनसे जल्द से जल्द आंदोलन समाप्त करा परिसर में शैक्षणिक माहौल बनाने की मांग की। उन्होंने कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से छात्र-छात्राओं को होने वाली परेशानियों से भी रजिस्ट्रार को अवगत कराया।
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विभिन्न मांगों को लेकर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की हड़ताल लगातार चौदहवें दिन जारी रही। इसकी वजह से परिसर में मंगलवार को भी कोई काम नहीं हुआ। कर्मचारियों ने सभा के साथ परिसर में जुलूस भी निकला। कर्मचारियों ने हॉस्टलों में घूमकर छात्रों से भी समर्थन मांगा। समर्थन में छात्रसंघ अध्यक्ष कुलदीप सिंह, पूर्व छात्रसंघ पदाधिकारी डॉ.राजेश सिंह, ब्रजेंद्र मिश्रा, सुरेश यादव आदि सभा में पहुंचे। रजिस्ट्रार ने सोमवार को कर्मचारियों की मांग के परिपेक्ष्य में विश्वविद्यालय का पक्ष रखा था लेकिन कर्मचारी उस पर राजी नहीं हुए। मंगलवार को इस तरह की कोई पहल नहीं हुई। इससे बुधवार को भी हड़ताल रहेगी।
प्रमोशन, रेशनलाइजेशन आदि मांग को लेकर संघटक कालेजों के कर्मचारियों ने भी विश्वविद्यालय परिसर में डेरा डाल दिया है। मंगलवार को वे सांकेतिक हड़ताल पर रहे। उन्होंने रजिस्ट्रार दफ्तर के नीचे दिन भर धरना दिया। इसकी वजह से सभी संघटक कालेजों में काम प्रभावित हुआ। कर्मचारियों ने 30 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की थी लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से वार्ता के लिए किसी प्रकार की पहल नहीं होने से नाराज कर्मियों ने बुधवार से ही कालेजों में अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी है। ज्यादातर कालेजों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू है। ऐसे में कालेज प्रशासन को दाखिला के लिए बाहर के लोगों की मदद लेनी होगी।
वेतन तथा समायोजन की मांग को लेकर विश्वविद्यालय के पत्राचार संस्थान के कर्मचारियों ने मंगलवार को भी रजिस्ट्रार दफ्तर के सामने धरना दिया। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनका कहना था कि अफसरों की उपेक्षा की वजह से उनका परिवार भूखमरी के कगार पर है। मांग पूरा नहीं होने तक उन्होंने आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी।
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