0इलाहाबाद। लोकसभा चुनाव न लड़ पाने से निराश पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता केसरीनाथ त्रिपाठी राज्यपाल बन गए। इसकी सूचना मिलने पर क्लाइव रोड स्थित उनके आवास पर समर्थकों का जमावड़ा लग गया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने पटाखे छोड़े और मिठाइयां बांटीं। नामित राज्यपाल केसरीनाथ ने कहा कि केंद्र सरकार ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी है और विश्वास जताया है। वह निश्पक्ष रूप से दायित्वों का निर्वहन करेंगे। कल्याण सिंह के नाम पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत तमाम राजनीतिक दलों के विरोध पर उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद होते रहते हैं। पश्चिम बंगाल में कोई कठिनाई महसूस नहीं होगी। झूंसी और शहर पश्चिमी से छह बार विधानसभा पहुंच चुके केसरीनाथ त्रिपाठी सन 1991 से मई 2004 के बीच में तीन बार विधानसभा अध्यक्ष चुने गए। जुलाई 2004 में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी बने। लोकसभा चुनाव में टिकट न मिलने से खिन्न श्री त्रिपाठी ने वाराणसी में नरेंद्र मोदी के नामांकन में शामिल हुए। उसी दौरान से उनके समायोजन की चर्चा थी। केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद राज्यपाल के रूप में उनका नाम आगे बढ़ा। सोमवार को दोपहर से ही आवास पर समर्थकों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। देर शाम तक मिठाइयों और आतिशबाजी का दौर चलता रहा। पश्चिम बंगाल के सह प्रभारी सिद्धार्थनाथ सिंह, जिलाध्यक्ष रामरक्षा द्विवेदी, महानगर अध्यक्ष शशि वार्ष्णेय, योगेश शुक्ल, बब्बूराम द्विवेदी, अमित मालवीय, शिव प्रसाद मिश्र, पदुम जायसवाल, मृत्युंजय तिवारी, शशांक शेखर पांडे, रणजीत सिंह, नरसिंह आदि ने कहा कि सरकार ने विधि जानकार को उचित स्थान दिया है।