इलाहाबाद। पैगंबरे इस्लाम हजरत मुहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हसन की 1432वीं यौमे पैदाइश पर सजी महफिल के दौरान जुटे शायरों ने खूबसूरत कलाम से उन्हें खिराजे अकीदत पेश किया। दरियाबाद की दरगाह मौला अली में मोहिब्बाने इमामे मौलूदे काबा की ओर से सोमवार रात सजी महफिल सहरी तक जारी रही। महफिल में मौजूद सलीम बलरामपुरी, फैयाज रायबरेलवी, माए चंदौली, अनवर सेथवी, हानी हल्लौरी, असद नसीराबादी, किरताज करबलाई, हैदर जैदी, मुनीर बनारसी, ऋषि बनारसी सहित तकरीबन दो दर्जन शायरों ने अपने कलाम से उनकी खूबियां बयां की। दरगाह मौला अली के पेश इमाम मौलाना अम्मार जैदी ने अध्यक्षता, संरक्षक बाकर नकवी ने स्वागत और नजीब इलाहाबादी ने संचालन किया। प्रबंध समिति अध्यक्ष सैयद अजादार हुसैन ने मेहमानों का शुक्रिया अदा किया। कार्यक्रम में हसन नकवी, बशारत अली खां, मुश्ताक हैदर, दिलशाह हुसैन, अबरार हुसैन आदि ने मौजूदगी दर्ज कराई।
इससे पहले बिसौना सादात में हुई महफिल में ‘कौन तालिबानी है, कौन खानदानी है, करबला की वादी में होगा इसका फैसला’ सुनाकर तालियां बटोरी गईं। महफिल में नायाब हल्लौरी, चंदन सान्याल, फैय्याज रायबरेलवी, सलीम बलरामपुरी, हानी हल्लौरी, असद नसीराबादी, किरताज करबलाई ने कलाम पेश किए। संयोजन मुश्ताक हैदर ने किया।