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पुलिस पहरे में रहा सन्नाटा, शव पहुंचे तो मचा कोहराम

Wed, 07 May 2014 05:30 AM IST
Allahabad
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इलाहाबाद। सोमवार शाम हुए खून-खराबे के बाद अहिराई दलित बस्ती में मरघट सरीखा सन्नाटा पसरा रहा। हमलावरों के परिवार घरों में ताला लगाकर फरार हो गए जबकि मारे गए चार लोगों के घरों में मातम पसरा रहा। पुलिसकर्मियों की आवाजाही और सदमे में डूबे परिजनों के विलाप से ही सियापा टूट रहा था। आरोपियों के घरों पर हमले के खतरे को देखते हुए पुलिस ने काफी सतर्कता बरती। मंगलवार शाम पोस्टमार्टम के बाद मृतकों के शव पुलिस पहरे के बीच गांव पहुंचे तब कोहराम मच गया। मृतकों की पत्नियों, बहनों, बच्चों की चीख-पुकार ने पुलिसवालों को भी दहला दिया।
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बहरिया के अहिराई दलित बस्ती में ताजी बनी सड़क पर अपने-अपने घर के सामने स्पीड ब्रेकर बनाने को लेकर दो गुटों में तनातनी ने सोमवार को खूनी शक्ल अख्तियार कर लिया। अपने मकान के सामने स्पीड ब्रेकर बनवाने के बाद सगे भाई रामबरन और रामशरण ने पड़ोसियों को भी ब्रेकर बनवाने से रोका तो वे भड़क गए। नतीजा एक ही परिवार के चार लोगों की हत्या के रूप में सामने आया। रामबरन (58), उसके बेटे राजीव (35), सगे भाई रामशरण (53) और बहनोई पन्नालाल (45) को विरोधी गुट के लोगों ने कुल्हाड़ी और फरसा से काट डाला। पन्नालाल के बेटे विकास को गहरी चोट पहुंची हालांकि उसकी जान बच गई। पुलिस के पहुंचने पर पहले तो हमलावरों ने दौड़ाया, फिर फोर्स आने पर घरों में ताला लगा भाग गए। घटना के बाद कई थानों की पुलिस-पीएसी, पैरा मिलेट्री फोर्स को गांव में तैनात कर दिया गया था क्योंकि हमलावरों के घरों में कोई नहीं था। ऐसे में यह खतरा था कि पीड़ितों की तरफ से बदले की भावना से उन मकानों पर हमला न कर दिया जाए। सोमवार रात और मंगलवार दोपहर तक इस दलित बस्ती में मारे गए लोगों के गमगीन रिश्तेदारों और परिजनों की सिसकियां गूंजती रहीं। दूर-दूर से शोक जताने केलिए रिश्तेदार आते-जाते रहे।
मंगलवार दोपहर दो डॉक्टरों के पैनल ने वीडियोग्राफी के बीच चारों शव का पोस्टमार्टम किया। इसके बाद दो एंबुलेंस में पुलिस पहरे के बीच शवों को अहिराई दलित बस्ती ले जाया गया। वहां एसपी गंगापार शफीक अहमद, सीओ फूलपुर, सीओ सोरांव तथा कई थानों की पुलिस, पीएसी, आरएएफ के साथ मुस्तैद थे। शाम करीब सवा चार बजे पुलिस पहरे के बीच दोनों एंबुलेंस में शव दलित बस्ती में रामबरन और रामशरण के घर के सामने आकर रुके तो फिर विलाप गूंजने लगा। उन दोनों भाइयों के अलावा राजीव और पन्नालाल की पत्नियां, बेटियां, बहनें शवों को देख, छूकर रोने-चीखने लगीं। राजीव की पत्नी नीलम तो बच्चों को सीने से लगाकर इस कदर चीख रही थी कि हर किसी का कलेजा मुंह को आ गया। यही हाल रामबरन की पत्नी शांति देवी, रामशरण की पत्नी गीता देवी और पन्नालाल की पत्नी राजकुमारी का था। उनके विलाप ने पुलिसवालों को भी द्रवित कर दिया।
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अहिराई दलित बस्ती में मंगलवार शाम तक पुलिस अफसरों के सामने मुश्किल स्थित पैदा हो गई जबकि परिवार के लोगों ने कह दिया कि जब तक उनकी मांग नहीं पूरी होती है वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। परिजनों ने कहा कि वे चारों मृतकों के एक-एक आश्रित को नौकरी दी जाए, उनकी सुरक्षा की व्यवस्था की जाए क्योंकि खतरा है कि आरोपी फिर हमला कर सकते हैं, और नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए। एसपी गंगापार ने मनाने की काफी कोशिश की मगर गुस्से से उफन रहे परिवार के लोगों ने मंगलवार को अंतिम संस्कार नहीं किया। ऐसे में देर रात तक पुलिस अफसर दलित बस्ती में डटे रहे। सीआरओ ओपी सिंह ने पांच-पांच लाख रुपये आर्थिक मदद दिलाने का भरोसा भी दिया।
अहिराई दलित बस्ती में दो सगे भाइयों समेत चार लोगों की हत्या की वारदात में पुलिस ने नौ लोगों के खिलाफ हत्या, डकैती, दलित उत्पीड़न, बलवा का मुकदमा लिखा है। मारे गए रामबरन की पत्नी शांति देवी की ओर से मिली अर्जी पर बहरिया थाने में लल्लू, बबलू, गिरीश, जीतू. हरिलाल, जगत, सोनू, जगधर यादव समेत नौ लोगों के खिलाफ धारा 147, 148, 149, 302, 395, 397 और एससी एसटी एक्ट में एफआईआर लिखी गई। आरोप है कि हमलावरों ने घरों में घुसकर लूटपाट की। गहने और नगदी लूट लिए। जगधर यादव ने जातिसूचक गालियां दीं।
चार लोगों की हत्या के दूसरे रोज मंगलवार दोपहर पोस्टमार्टम हाउस पर कई नेता शोक जताने पहुंचे। दूसरे ही रोज मतदान होने की वजह से भी नेताओं ने शोक जताने पर खास ध्यान दिया। फूलपुर सीट के कांग्रेस प्रत्याशी मोहम्मद कैफ, बसपा प्रत्याशी कपिलमुनि करवरिया, सपा प्रत्याशी धर्मराज पटेल, विधायक सत्यवीर सिंह मुन्ना, अनुग्रह नारायण सिंह ने दुखी परिजनों से मिलकर उन्हें सांत्वना दी।
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