इलाहाबाद (ब्यूरो)। सोलहवीं लोकसभा चुनाव के बीच यूपी बोर्ड परीक्षा की कापियों का मूल्यांकन होने से रिजल्ट की घोषणा में देरी हो सकती है। चुनाव एवं मूल्यांकन दोनो कार्य के लिए शिक्षकों की ड्यूटी लगाए जाने से कापियों को जांचने में विलंब होने की संभावना है। चार अप्रैल को परीक्षा पूरी होने के बाद अब बोर्ड की ओर से 11 से 26 अप्रैल के बीच मूल्यांकन होगा। दोनो व्यवस्था शिक्षकों से जुड़ी होने एवं मतदान तिथि के अतिरिक्त चुनाव प्रशिक्षण में शिक्षकों की ड्यूटी लगाए जाने के कारण माना जा रहा है कि मूल्यांकन पिछड़ेगा। यूपी में चुनाव 10, 17, 24, 30 अप्रैल एवं सात तथा 12 मई को होगा।
यूपी बोर्ड परीक्षा तीन मार्च से शुरू हुई थी जो चार अप्रैल को खत्म हो रही है। बोर्ड परीक्षा में पूरे प्रदेश से 71 लाख से अधिक परीक्षार्थी पंजीकृत थे जबकि परीक्षा में 65 लाख छात्र-छात्राएं शामिल हुए। अब बोर्ड की ओर से पूरे प्रदेश में हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की कापियों का मूल्यांकन 11 से 26 अप्रैल के बीच 15 दिन में पूरा होगा। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष राम प्रकाश पांडेय का कहना है कि कापियों के मूल्यांकन के दौरान अंतिम समय में कापियां शेष रहने पर इसे आगे बढ़ा दिया जाता है। ऐसे में चुनाव कार्य के लिए प्रशिक्षण, मूल्यांकन दोनों साथ होने पर प्रदेश भर में निर्वाचन के साथ बोर्ड का परीक्षा परिणाम पिछड़ सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे में शिक्षकों पर मूल्यांकन एवं निर्वाचन दोनों काम समय से पूरा करने का दबाव होगा। शिक्षकों को निर्वाचन कार्य में लगाए जाने पर बोर्ड की ओर से तय समय में मूल्यांकन पूरा कर पाना संभव नहीं होगा। बोर्ड को हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा का परिणाम समय से घोषित करने में परेशानी हो सकती है।