फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

न रोजगार न व्यापार, बेबस है गंगापार

Wed, 02 Apr 2014 05:30 AM IST
Allahabad
विज्ञापन
विज्ञापन
इलाहाबाद। फूलपुर लोकसभा क्षेत्र से सभी दलों के उम्मीदवार तय हो चुके हैं। जीत के लिए सभी मतदाताओं को लुभाने में भी लग गए हैं। इस क्षेत्र से पंडित जवाहरलाल नेहरू, विजय लक्ष्मी पंडित, जनेश्वर मिश्रा, विश्वनाथ प्रताप सिंह और कमला बहुगुणा समेत कई नामचीन लोग चुनाव जीत चुके हैं, लेकिन गंगापार की हालत नहीं सुधरी। मतदाताओं ने बड़े-बड़ों का बेड़ा पार कर दिया। परंतु, इफ्को को छोड़ दें तो क्षेत्र में न रोजगार के अवसर बढ़े, न ही कारोबार की तरक्की हुई। नगदी फसलों की बहुलता वाला यह क्षेत्र कृषि उद्योग में शून्य हैं। किसान परेशान हैं। क्षेत्र के लोगों का मानना है कि फाफामऊ पुल विकास के रास्ते की बड़ी बाधा है। लोग नैनी और झूंसी आसानी से चले जाते हैं लेकिन फाफामऊ का नाम सुनते ही कतराने लगते हैं। प्रत्याशियों का ध्यान इस तरफ नहीं है। लड़ाई जातीय जोड़ घटाने पर ही हो रही है।
विज्ञापन

प्रत्याशियों के नामों का ऐलान होने के साथ ही चुनाव प्रचार चढ़ने लगा है। वाहन जुलूस, छोटी-छोटी जनसभाओं, जातीय बैठकों और होली मिलन समारोहों के जरिए मतदाताओं को प्रत्याशी यह समझाने की कोशिशें कर रहे हैं कि वह इलाके को चमन कर देंगे। कुछ ऐसा ही वादा पहले जीत चुके सांसदों ने भी किया लेकिन हुआ कुछ नहीं। फूलपुर के टिकरी गांव निवासी अनिल तिवारी बताते हैं ‘तीन दिन पहले भतीजे विपिन तिवारी को रात में इलाज के लिए शहर लाना था लेकिन पुल पर जाम के कारण फाफामऊ के नर्सिंग होम में भर्ती कराना पड़ा। ठीक इलाज न मिलने से उसकी मौत हो गई।’ जाम से बच्चे परीक्षा में समय से नहीं पहुंच पाते। कार्यालय पहुंचने में देर हो जाती है। फोरलेन पुल होता तो इन समस्याओं से निजात मिलती ही। क्षेत्र का भी विकास होता।
कौड़िहार निवासी व प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राम विशाल मिश्रा कहते हैं कि क्षेत्र में कृषि उद्योगों को बढ़ाने, हरी सब्जियों के लिए कोल्ड स्टोरेज के निर्माण, फाफामऊ पुल और सड़कों को चौड़ा करने जैसे मुद्दे प्रत्याशियों के सामने उठाए जाएंगे। गंगा पुल को चौड़ा करने से बीमारों के साथ ही किसानों, व्यापारियों, कर्मचारियों को फायदा होने के साथ इलाके के विकास का रास्ता भी खुलेगा। यह पुल क्षेत्र के पिछड़ेपन का प्रतीक बन गया है।
विज्ञापन

फाफामऊ में जिले की सबसे बड़ी अनाज मंडी है। नवाबगंज, कौड़िहार, लालगोपालगंज, होलागढ़, शिवगढ़, दहियावां, मंसूराबाद क्षेत्र हरी सब्जियों की पैदावार के लिए जाने जाते हैं। मऊआइमा बुनकरों और पटाखा निर्माण का केंद्र है, लेकिन इनके विकास की बात प्रत्याशी नहीं कर रहे हैं।
शांतिपुरम कालोनी में होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज है लेकिन जाम के कारण शहरियों को इसका ज्यादा लाभ नहीं मिल पाता। तीन इंजीनियरिंग कॉलेज समेत कई शिक्षण संस्थाएं भी यहां खुल रही हैं। इनके बाद भी लोग यहां जाने से कतराते हैं। शांतिपुरम निवासी डॉ एसके सिंह कहते हैं कि ज्यादातर समस्याओं की जड़ संकरी सड़क और पुल है। दोनों सुधर जाएं तो यह भी नैनी, झूंसी जैसा विकसित क्षेत्र बन सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें