इलाहाबाद। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रवक्ताओं की नियुक्ति में मनमाना तरीका अपनाने और कोर्ट के आदेश की अनदेखी करने को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। विश्वविद्यालय के अधिकारियों को जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए पूछा है कि क्यों न नियुक्त किए गए प्रवक्ताओं को दिया गया वेतन वसूल लिया जाए। सीएमपी डिग्री कालेज की डा. मोहिनी वर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति एके मिश्र की खंडपीठ ने दिया है। याचिका में कहा गया कि डा. मोहिनी वर्मा की नियुक्ति सीएमपी डिग्री कालेज में तबला सहायक के पद पर की गई थी। उन्होंने प्रवक्ता के पद पर प्रोन्नति देने की प्रार्थना की तो कुलपति ने यह कहते हुए प्रार्थनापत्र खारिज कर दिया कि जिस पर उनकी नियुक्ति की गई है वह पद रिक्त नहीं था। याची का कहना था कि ठीक इसी प्रकार के मामले में विश्वविद्यालय ने डा. नरेंद्र कुमार पांडेय, डा. शैलेंद्र तिवारी और डा. शैला रहमानी को प्रवक्ता के पद पर प्रोन्नति दी है। जबकि इन लोगों की नियुक्ति भी सामान्य पदों के लिए हुई थी। इन लोगों ने प्रवक्ता पद पर प्रोन्नति के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी जिसे खारिज कर दिया गया, इसके बावजूद इनको प्रोन्नति दी गई। खंडपीठ ने कहा कि ऐसे मामले में प्रोन्नत प्रवक्ताओं को दिए गए वेतन की वसूली जरूरी है।