घूरपुर (इलाहाबाद)। खाना बनाते समय जली पत्नी की हत्या के केस में फंसाने की ससुरालियों की धमकी से परेशान होकर एक युवक ने आत्महत्या कर ली। नैनी की एक कंपनी में काम करने वाले युवक ने मंगलवार दोपहर घूरपुर इलाके में ट्रेन के सामने लेटकर जान दे दी। सुसाइड नोट में उसने लिखा था कि पिछले महीने पत्नी की मौत के बाद से लगातार हत्या के मुकदमे में फंसाने की धमकी से वह दुखी और परेशान है।
उड़ीसा में केंद्रापारा जनपद के कृष्णा बेहरा बरसों पहले इलाहाबाद आकर इरादतगंज (घूरपुर) स्थित ग्लास फैक्ट्री में काम करने लगे थे। वह फैक्ट्री की कॉलोनी में परिवार सहित रहते थे। फैक्ट्री बंद होने के बाद वह पत्नी के साथ उड़ीसा चले गए। उनकी एक बेटी और चार बेटे हैं। बेटी कादंबरी का ब्याह हो चुका है। बड़े बेटे जयंत का बैंक ऑफ बड़ौदा में पीओ पद पर चयन हो गया है। दूसरा पुत्र नीलेंद्र बेहरा दिल्ली और सबसे छोटा सत्येंद्र बंगलुरू में नौकरी करता है। तीसरे नंबर का बेटा कमलेंद्र बेहरा (26) आईटीआई में कोर्स करने के बाद नैनी स्थित एरीवा कंपनी में काम कर रहा था। उसने पिछले साल उड़ीसा में अपने गांव की मौसमी से लव मैरिज की थी। वह पत्नी मौसमी के साथ ग्लास फैक्ट्री की कॉलोनी में रहता था।
विगत नौ सितंबर को खाना बनाते समय मौसमी गंभीर रूप से जल गई। उसे शहर में निजी अस्पताल ले जाया गया,जहां दूसरे दिन उसकी मौत हो गई। पत्नी के निधन के बाद कमलेंद्र कॉलोनी की बजाय दूसरे कमरे में किराए पर रहने लगा था। मंगलवार दोपहर लोगों ने उसे फैक्ट्री के पास रेलवे लाइन के पास देर तक फोन पर बात करते देखा। करीब डेढ़ बजे इलाहाबाद से इंदौर जा रही क्षिप्रा एक्सप्रेस उधर आ रही थी, तभी कमलेंद्र रेल पटरी पर गर्दन रखकर लेट गया। ट्रेन के इंजन के धक्के से उसका सिर फट गया। ट्रेन गुजरने के बाद आसपास मौजूद लोग वहां भागकर पहुंचे। कमलेंद्र की मौत हो चुकी थी। लोग उसे पहचानते थे। घूरपुर पुलिस भी खबर पाकर आ गई। जीआरपी मानिकपुर को खबर दी गई। सिपाहियों ने कमलेंद्र के जेब की तलाशी ली तो दो पन्ने का सुसाइड नोट मिला। उसमें कमलेंद्र ने लिखा था कि पत्नी मौसमी की जलकर मौत की घटना में ससुराल वाले उसे हत्या के मुकदमे में फंसाने की धमकी दे रहे हैं। उसने अस्पताल में भर्ती मौसमी से फोन पर उसके परिजनों से बात करा दी थी। मौसमी ने दम तोड़ने से पहले मायके वालों से कहा था कि वह खाना बनाते समय जली। तब भी ससुराल वाले बार-बार फोनकर उसे फंसाने की धमकी देकर पैसे मांगते रहे। कुछ दिन पहले बड़े भाई ने बैंक से कर्ज लेकर दो लाख रुपये दिए थे। मगर इधर तीन-चार दिन से ससुराल वाले उसे फिर धमकियां देने लगे थे। इसी वजह से परेशान होकर उसने आत्महत्या का गलत कदम उठाया है। कमलेंद्र ने नोट में आत्महत्या के लिए अपने भाइयों और दोस्तों से माफी भी मांगी।
ससुरालियों की धमकी से त्रस्त होकर ट्रेन से कटकर आत्महत्या करने वाला कमलेंद्र बेहरा इरादतगंज में ही पला-बढ़ा था। ऐसे में यहां ज्यादातर लोग उसे पहचानते थे। उसके कई दोस्त भी बन गए। खबर पाकर इलाके के तमाम लोग और दोस्त रेलवे ट्रैक पर पहुंच गए थे। घूरपुर थाने के दो सिपाही भी आए। दोस्त और परिचित भी पहुंच गए। लेकिन किसी ने भी कमलेंद्र के शव पर चादर डालने की भी संवेदना नहीं दिखाई। घूरपुर थाने के सिपाही यह कहकर चले गए कि मामला मानिकपुर जीआरपी थाने का है। परिवार के लोग भी नहीं आ सके। इसलिए शव रात तक रेलवे ट्रैक किनारे खुले में पड़ा रहा। रेलवे का एक चौकीदार को शव देखने के लिए कहकर सिपाही चले गए थे। रात में जीआरपी ने आकर शव को सील किया।