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घर पहुंच महीनों शरणार्थी ही रहेंगे बाढ़ पीड़ित

Tue, 03 Sep 2013 05:35 AM IST
Allahabad
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इलाहाबाद। बाढ़ का पानी धीमे-धीमे घटने लगा है और इसी के साथ लोगों के घर लौटने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। हालांकि चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। राहत केंद्रों या अपने रिश्तेदारों, मित्रों के यहां टिके बाढ़ पीड़ितों की हालत घर पहुंचने के बाद भी शरणार्थियों जैसी ही रहेगी। बाढ़ के बाद कमजोर हो चुकी मकान की नींव खतरे का संकेत देती रहेगी तो चौतरफा फैली गंदगी सेहत पर संकट बनकर मंडराती रहेगी। हालात सामान्य होने में अभी महीनों लग जाएंगे। लगातार एक माह तक घरों के इर्दगिर्द जमा बाढ़ के पानी ने मकानों की नींव खोखली कर दी है। जिन इलाकों में बाढ़ का पानी उतरने लगा है, वहां बड़े पैमाने पर गंदगी फैली हुई है। शहर के ज्यादातर इलाकों में नाले का पानी बैकफ्लो हो गया था, सो बाढ़ लौटने के बाद सड़कों, घरों पर कीचड़ की तीन से चार इंच मोटी परत जम गई है। घरों की दीवारों पर दरार पड़ चुकी है। सभी कमरों में सीलन फैली हुई है। लैट्रिन-बाथरूम की नालियां भी पूरी तरह से चोक हो गई हैं। लकड़ी के तमाम सामान और रजाई-गद्दे सड़ गए हैं। इलेक्ट्रानिक उपकरण फुंक गए हैं। ज्यादातर घरों में बिजली की वायरिंग भी खराब हो चुकी है। इन परिस्थितियों में घर लौटने वाले बाढ़ पीड़ितों के लिए ढेरों चुनौतियां खड़ी हो गई है। बाढ़ के कारण गंदगी इस कदर फैली हुई है कि घर की पूरी तरह से साफ-सफाई में ही एक माह का समय बीत जाएगा। बाढ़ के पानी से कई कमरों की दीवारें चटक गई हैं, सो लोगों को अपनी गृहस्थी भी सुरक्षित बचे कमरों में ही सीमित करनी होगी। घरों की दीवारों को सीलन ने इस कदर जकड़ लिया है कि लोगों को महीनों इस समस्या से निजात नहीं मिलने वाली। दो माह में जाड़े का मौसम शुरू हो जाएगा। ऐसे में सीलन के कारण लोगों पर बीमार होने का खतरा मंडराता रहेगा। तमाम परिवारों की तो पूरी गृहस्थी ही चौपट हो गई है। महंगाई के दौर में गृहस्थी के जरूरी सामान जुटाने में ही महीनों बीत जाएंगे। घर लौटने वालों को ऐसी ही तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा और वे अपने घर में रहते हुए भी महीनों शरणार्थी ही रह जाएंगे।
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