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गर्भवती को अस्पताल से लौटाया तो होगी कार्रवाई

Mon, 19 Aug 2013 05:34 AM IST
Allahabad
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इलाहाबाद। सरकारी अस्पतालों में गर्भवती का इलाज करने के बजाए टरकाने वाले चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों पर सीधी कार्रवाई होगी। मंडलायुक्त ने मंडल के सभी सीएमओ, चिकित्साधिकारियों को निर्देशित किया है कि वह अस्पतालों में तमाम मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराएं ताकि मरीजों को बेहतर लाभ मिल सके। उन्होंने चिकित्साधिकारियों को चेताया कि वह औचक निरीक्षणों की संख्या बढ़ाएं ताकि स्वास्थ्य योजनाओं का क्रियान्वयन ठीक ढंग से कराया जा सके। मंडलायुक्त कुमार कमलेश सभी सीएमओ और चिकित्साधिकारियों के साथ मंडल स्तरीय समीक्षा कर रहे थे। समीक्षा के दौरान उन्होंने चिकित्साधिकारियों को सेवा का भी पाठ पढ़ाया। मंडलायुक्त ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के पास बजट की कमी नहीं है। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत भारी भरकम बजट मुहैया कराया जा रहा है। जरूरत योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन की है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि टीबी, अंधता और कुष्ठ रोग के जिन मरीजों का इलाज किया गया है उनका समय समय पर फीडबैक लिया जाना चाहिए। जननी सुरक्षा योजना की समीक्षा के दौरान मंडलायुक्त ने कहा कि गर्भवती के इलाज में किसी भी प्रकार की कोताही न बरती जाए। यदि सुविधाएं न होने का बहाना बनाकर किसी भी गर्भवती को अस्पताल से लौटाया गया तो संबंधित चिकित्साधिकारी और स्वास्थ्यकर्मी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मरीजों को 108 एंबुलेंस सेवा का बेहतर लाभ मिल सके इसके लिए एंबुलेंस का औचक निरीक्षण किया जाए। साथ ही यह सुनिश्चित कराया जाए कि एंबुलेंस में पैरामेडिकल स्टाफ होने के साथ ही आक्सीजन सिलेंडर समेत अन्य स्वास्थ्य सुविधाएं मौजूद हैं। पीएनडीटी एक्ट की समीक्षा के दौरान उन्होंने सभी सीएमओ को निर्देशित किया कि वह अल्ट्रासाउंड केंद्रों की औचक जांच पड़ताल करें। अनाधिकृत अल्ट्रासाउंड केंद्रों को सील कर संचालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। समीक्षा बैठक में सीएमओ डॉ. पद्माकर सिंह के अलावा प्रतापगढ़, कौशांबी, फतेहपुर के सीएमओ और चिकित्साधिकारी उपस्थित थे।
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