इलाहाबाद। सिर्फ ग्यारह महीनों के दौरान तीन चर्चित उपन्यास लिखकर इलाहाबाद की युवा लेखिका लीमा धर ने फिर एक और कीर्तिमान अपने नाम किया है। असफल प्रेम के बाद एक युवती की ओर से प्रतिशोध के पहलुओं से जुड़ी कहानी के बहाने लीमा ने दिल्ली के गैंगरेप से लेकर महिलाओं के शोषण, संघर्ष और उनके हौसले की दास्तान को बखूबी बयां किया है। नए उपन्यास ‘द गर्ल हू किस्ड द स्नेक’ के बाजार में आने से पहले ही फेसबुक पर पाठकों के बीच जबर्दस्त क्रेज और बुक स्टॉल्स पर एडवांस बुकिंग शुरू है। उनके प्रकाशक और जनरल प्रेस के संचालक अजीम अहमद खान उसकी सफलता को लेकर चकित हैं।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा लीमा ने सिर्फ साढ़े उन्नीस बरस की उम्र में तीन उपन्यास लिखकर. लेखकों की रेस में बाजी मारी है। बीते अगस्त में ‘टिल वी मीट अगेन, अक्तूबर में मॉम ऐंड आई लव ए टेररिस्ट’ के बाद अब जून में उसका तीसरा उपन्यास आया है। उसे मिल रही बधाइयों में उसकी उम्र की तमाम दोस्तों ने डॉक्टर, इंजीनियर नहीं उस जैसी लेखिका बनने की ख्वाहिश की है। लीमा का मानना है कि युवाओं पर कोई भी कॅरियर थोपने से बेहतर है कि वे उसे अपनाएं जिसमें उनकी रुचि और कौशल हो। फिलहाल पूरी तरह से लेखन से जुड़ी लीमा महिलाओं केमुद्दों, उनकी मुश्किलों को लेकर अगले उपन्यास ‘द बर्ड बियांड द हौरिजन’ में व्यस्त है जो अविवाहित महिलाओं पर केंद्रित है।
सिर्फ तेरह बरस की उम्र में लेखक पिता समीर धर और शिक्षिका मां मौसमी की बेटी लीमा ने हिन्दी में काव्य संग्रह ‘कुछ लफ्ज नकाब में’ लिखकर दुनिया की सबसे कम उम्र की कवयित्री के बाद 16 वर्ष 11 माह की उम्र में अंग्रेजी में काव्य संग्रह ‘फॉर द हंड्रेड टुमारोज’ लिखकर दो भाषाओं में लिखने वाली सबसे कम उम्र की कवयित्री बनने का रिकार्ड बनाया था। पहले उपन्यास की सफलता के बाद कई अंतर्राष्ट्रीय प्रकाशकों ने उसके दूसरे उपन्यास को प्रकाशित करने का प्रस्ताव रखा था। लीमा उत्साह से भरी है, उसके पास सपने हैं और शब्द भी, ऐसे में सफलता का सिलसिला जारी रहेगा, यह कहना बेमानी नहीं।