इलाहाबाद। आरुषि-हेमराज मर्डर केस में 14 गवाहों को समन करने की मांग को लेकर दाखिल तलवार दंपत्ति की याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। डा. राजेश और नुपूर तलवार ने निष्पक्ष परीक्षण के लिए इन गवाहों को भी परीक्षित कराए जाने की मांग की थी। याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति आरडी खरे ने कहा कि याचीगण ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं ला सके जिससे किसी प्रकार के भेदभाव का पता चलता हो। स्पेशल जज सीबीआई कोर्ट गाजियाबाद के आदेश को सही करार देते हुए गवाहों को समन करने की मांग ठुकरा दी है।
याचिका में कहा गया कि आरुषि कांड में सत्य को सामने लाने के लिए कुछ अहम गवाहों का परीक्षण जरूरी है। हत्याकांड की जांच में शामिल रहे सात विवेचनाधिकारियों और कुछ अन्य लोगों सहित 14 साक्षियों को सीबीआई ने गवाहों की सूची में शामिल नहीं किया है। सीबीआई कोर्ट ने इनको गवाह बनाए जाने संबंधी प्रार्थनापत्र चार मई 2013 को खारिज कर दिया है। बचाव पक्ष को निष्पक्ष विचारण की उम्मीद नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि जिन गवाहों को समन करने की मांग की गई है उसमें अरुण कुमार जांच अधिकारी नहीं थे। वह मात्र विवेचना की निरीक्षण कर रहे थे। यतीश चंद्र शर्मा, प्रमोद कुमार तलवार, एचएस सचान, पंकज बंसल, मुकेश शर्मा, नरेश इंदोरा और आरएस कुरील ने संक्षिप्त विवेचना की है। इनको परीक्षण हेतु बुलाना आवश्यक नहीं है। बचाव पक्ष को अभियोजन के गवाहों से जिरह करने का पूरा मौका दिया गया है। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता है कि परीक्षण निष्पक्ष नहीं है। इसलिए सीबीआई कोर्ट के आदेश में कोई अनियमितता नहीं है। हाईकोर्ट ने सीबीआई कोर्ट को निर्देश दिया है कि आरोपियों को बचाव का पूरा मौका दिया जाए।