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‘सूरज’ और ‘लैंप’ की लड़ाई में जमकर मारपीट, चले डंडे

Fri, 26 Apr 2013 05:30 AM IST
Allahabad
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इलाहाबाद। मान्यता प्राप्त संगठनों के लिए हो रहे चुनाव में मतदान के पहले दिन उत्तर मध्य रेलवे क्षेत्र में मेन्स यूनियन और इंप्लाइज संघ के बीच जमकर टक्कर देखने को मिली। मतदान के पहले दिन लगभग 47 फीसदी वोट पड़े। एक दूसरे पर हावी होने की कोशिश में दोनों प्रमुख संगठनों के समर्थकों में कई जगह विवाद हुआ। डीएसए ग्राउंड मतदान केंद्र पर विवाद इतना बढ़ा कि दोनों पक्षों में पहले हाथापाई, फिर मारपीट हुई। डंडे भी चले। दिन में कई अन्य केंद्रों पर भी विवाद हुआ। डीएसए ग्राउंड के मतदान केंद्र पर दोपहर करीब 12 बजे अचानक मारपीट शुरू हो गई। इसमें मेन्स यूनियन समर्थक गिरीश त्रिपाठी और इंप्लाइज संघ के समर्थक अरविंद कुमार सिंह को चोटें आईं। दोनों पक्षों ने खुल्दाबाद थाने में एक- दूसरे के खिलाफ तहरीर दी है। गिरीश का आरोप है कि मतदान धीमा होने के कारण वह कारण पता करने बूथ के अंदर गए। उनके मुताबिक वहां संघ के महामंत्री आरपी सिंह के पुत्र तथा रेलवे इंजीनियर अभिषेक राठौर और उनके दो समर्थक अरविंद सिंह, राजेश गौड़ बूथ के अंदर खड़े थे। आरोप है कि टोकाटाकी करने पर उनकी पिटाई की गई। संघ के महामंत्री आरपी सिंह का आरोप है कि गिरीश त्रिपाठी कुछ अन्य समर्थकों के साथ बूथ के अंदर मतदाताओं को पकड़ कर ले जा रहे थे। पूछताछ करने पर डंडे से अरविंद के हाथ पर प्रहार कर दिया। अरविंद के चोटिल होने पर मारपीट हुई। इलाहाबाद में बने ज्यादातर मतदान केंद्रों पर दोनों संगठनों में आरपार की लड़ाई नजर आई। मेंस यूनियन के चुनाव निशान ‘लैंप’ और इंप्लाइज संघ के निशान ‘सूरज’ हर बूथ पर एक-दूसरे को तगड़ी टक्कर देते दिखे। रेल मजदूर यूनियन, नार्थ सेंट्रल रेलवे कर्मचारी संघ और उत्तर मध्य रेलवे कर्मचारी संघ के समर्थक ज्यादातर मतदान केंद्रों पर नहीं दिखे। तीन दिनी मतदान के पहले दिन सुबह 10 से अपराह्न एक बजे तक एईएन दफ्तर, सीएमएस कार्यालय, लोको शाखा, इलाहाबाद जंक्शन, डीआरएम दफ्तर, सीडीओ कार्यालय केंद्रों पर लंबी कतार देखने को मिली। इन सभी केंद्रों पर मेन्स यूनियन और इंप्लाइज संघ के पोलिंग बूथ लगे थे जहां कर्मचारियों की भीड़ रही। कर्मचारियों और मेन्स यूनियन तथा इंप्लाइज संघ के पदाधिकारियों का मानना है कि सीधा मुकाबला होने के कारण चौंकाने वाले नतीजे देखने को मिल सकते हैं। संघ के मंडल उपाध्यक्ष बेचन अली का आरोप है कि मतदान के दो दिन पहले केंद्रों में बदलाव कर दिया गया। संगठन ने पुराने मतदान केंद्रों के आधार पर एजेंट तय किए थे। मतदान केंद्रों में बदलाव के बाद एजेंट भी बदले जाने थे लेकिन रेलवे प्रशासन ने इसकी इजाजत नहीं दी। इसके कारण कई बूथों एक-एक एजेंट ही रखे जा सके। इससे काफी परेशानी उठानी पड़ी।
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