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सरकार से पहले खुद लगाएं गुटखा पर पाबंदी

Mon, 01 Apr 2013 05:30 AM IST
Allahabad
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इलाहाबाद। गुटखा पर प्रदेश में सरकारी पाबंदी का तय वक्त आ गया है। सरकार और प्रशासन गुटखा की बिक्री पर रोक लगा पाता है या नहीं, इससे ज्यादा जरूरी है आप खुद इसके सेवन से खुद को दूर रखिए। खुद भी गुटखा न चबाएं और अपने बच्चों को भी इससे होने वाली खतरनाक बीमारी के बारे में सचेत कर उन्हें भी इसका नशेड़ी होने से बचाएं। वजह ये है कि गुटखा पर रोक की मांग के बीच इससे होने वाले मर्ज में तेजी से इजाफा हुआ है। कैंसर और दांतों के डॉक्टर तो बताते हैं कि पिछले छह माह में इलाहाबाद परिक्षेत्र में गुटखा चबाने से कैंसर और दांत के रोगियों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि बाजार में गुटखा बिक्री पर पाबंदी हो या न हो, खुद पर पाबंदी जरूर लगाएं। इंडियन डेंटल एसोसिएशन ने गुटखा के चलते किशोरों से लेकर बुजुर्गों तक के सेहत पर पड़ते बुरे प्रभाव को देखते हुए पिछले साल हाईकोर्ट में याचिका दायर कर गुटखा की बिक्री बंद कराने की गुजारिश की थी। एक अप्रैल से सरकार ने प्रदेश में गुटखा की बिक्री पर रोक की बात कही थी। अब यह आदेश कब लागू होता है? इसका सबको इंतजार है। मगर इसके इस्तेमाल के खतरे को देखते हुए होना यह चाहिए कि समझदारी दिखाते हुए लोग खुद और बच्चों को गुटखा के नशे से दूर ही बनाएं रखें। कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ.बीके मिश्र बताते हैं कि गुटखा का सेवन हजारों -लाखों युवाओं का भविष्य खराब कर रहा है। उनके पास रोज औसतन 10 ऐसे नए मरीज आते हैं जो गुटखा के चलते कैंसर की चपेट में आए। ज्यादा चौंकाने वाली बात यह कि नए मरीजों में 20 से कम उम्र के भी युवा हैं। लगातार गुटखा चबाने के चलते कैंसर की चपेट में आने पर लक्षण दिखते ही डॉक्टर के पास पहुंचने वाले मरीजों की जान बचा ली जाती है लेकिन इसमें लापरवाही करने वाले भगवान भरोसे होते हैं। इसी तरह, दंत रोग विशेषज्ञ डॉ.ओपी उपाध्याय के क्लीनिक में रोज औसतन पांच ऐसे नए मरीज पहुंच रहे हैं जो गुटखा खाने से बीमारी की चपेट में आए। डॉ.रंजन बाजपेयी के मुताबिक गुटखे की लत लोगों को गंभीर बीमारी की तरफ धकेल रही है। उनके क्लीनिक में 14-15 साल के भी ऐसे किशोर आते हैं जो गुटखा के सेवन के चलते दांत और मसूढ़ों की बीमारी का शिकार हुए। इन डॉक्टरों का कहना है कि गुटखा पर पाबंदी तो फौरन लगनी चाहिए पर जागरूक नागरिक के रूप में यह हर किसी की जिम्मेदारी है कि गुटखा से खुद दूरी बनाएं और दूसरों को भी इसकी खातिर प्रेरित करें, वरना यह नशा जिदंगी जीना दुश्वार कर सकता है। इलाहाबाद। गुटखा के नशे की चपेट में केवल पुरुष ही नहीं हैं। ग्रामीण ही नहीं, शहर में भी बड़ी संख्या में लड़कियां-महिलाएं गुटखा चबाने लगी हैं। कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ.बीके मिश्रा और दंत रोग चिकित्सक डॉ. रंजन बाजपेयी बताते हैं कि इधर कुछ समय से उनके पास गुटखा चबाने वाली महिलाएं भी इलाज की खातिर पहुंच रही हैं। यह चिंता का विषय है। गुटखा पर फौरन रोक नहीं लगी तो स्थिति भयावह होगी।
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