रेल बजट से निराश अर्थशास्त्रियों को बृहस्पतिवार को पेश होने वाले आम बजट से भी कोई उम्मीद नहीं है। उनका कहना है कि रेल बजट तथा वित्तमंत्री की ओर से इसकी तारीफ किए जाने के बाद साफ है कि चुनाव से पहले आखिरी बजट होने के कारण सरकार कोई कड़ा फैसला नहीं लेने जा रही लेकिन देश की वर्तमान आर्थिक स्थिति लोकलुभावन बजट की भी अनुमति नहीं देती। इसलिए लोगों को महंगाई से फिलहाल राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर पीके घोष का कहना है कि सरकार के सामने विकास दर बढ़ाना और महंगाई पर नियंत्रण बड़ी चुनौती है। ऐसे में खर्च में कटौती तथा आमदनी बढ़ाने के लिए टैक्स के एक और स्लैब की बात की जा रही थी लेकिन रेल बजट को देखने के बाद इसकी अब कम उम्मीद है।
उनका कहना है कि वैश्विक कारणों से अर्थव्यवस्था एक गंभीर चुनौती है इसलिए सरकार से टैक्स छूट सीमा बढ़ाने की भी बहुत उम्मीद नहीं की जा सकती। हां, आधारभूत ढांचे के विकास के लिए वित्तमंत्री नए बांड ला सकते हैं। प्रोफेसर घोष का कहना है कि निमभन आय वर्ग के लोगों को लुभाने के लिए वित्तमंत्री सस्ते आवास की घोषणा कर सकते हैं।
विश्वविद्यालय के ही वाणिज्य संकाय के प्रोफेसर असीम मुखर्जी ने कहा कि रेल बजट की तरह आम बजट से भी बहुत उम्मीद नहीं है। खजाने में पैसा नहीं है। इसलिए विकास पर बजट नहीं बढ़ेगा। यह चुनावी बजट होगा। इसलिए मध्यम वर्ग को लुभाने के लिए सरकार टैक्स सीमा में मामूली बढ़ोतरी कर सकती है।
साथ में कारपोरेट टैक्स में कमी की भी बात कही जा रही है। लेकिन साथ में अर्थव्यवस्था को देखते हुए वस्तुओं, कृषि उत्पादों पर टैक्स बढ़ाने की भी जरूरत है। हालांकि रेल बजट को देखते हुए नहीं लगता कि वित्तमंत्री यह कर पाएंगे। इससे महंगाई और बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि पर भी सरकार खर्च बढ़ाने नहीं जा रही है।