विश्व स्वास्थ्य संगठन और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को पल्स पोलियो प्रतिरक्षण अभियान की शुरूआत की गई। पांच दिन संचालित प्रतिरक्षण अभियान के तहत पहले दिन जिले में 35 फीसदी बच्चों को दवा पिलाई गई।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. पदमाकर सिंह के मुताबिक पल्स पोलियो ड्राप पिलाने के लिए जिले में 3466 बूथ बनाए गए थे। जिले में बाकी बचे बच्चों को दवा पिलाने के लिए स्वास्थ्य टीमें सोमवार से घर-घर जाएंगी। अभियान की शुरूआत जिला महिला चिकित्सालय से की गई।
सीएमओ और महिला चिकित्सालय की एसआईसी डॉ. आशा पांडेय ने बच्चों को पोलियो ड्राप पिलाई। सीएमओ ने बताया कि शनिवार तक जिले में पांच वर्ष तक के कुल 9 लाख, 67 हजार बच्चों को पोलियो ड्राप पिलाने का लक्ष्य रखा गया है। घर-घर जाकर दवा पिलाने के लिए 1794 टीमों का गठन किया गया है। 483 टीमें शहरी क्षेत्र में दवा पिलाने के लिए जाएंगी। इसके अलावा 144 ट्रांजिट/ मोबाइल टीमें भी सार्वजनिक स्थानों पर तैनात की गई है।
दूसरी ओर जिला प्रतिरक्षण अधिकारी कैप्टन डॉ. आशुतोष ने बताया कि अभियान की देखभाल के लिए 594 पर्यवेक्षक लगाए गए हैं। 20 पर्यवेक्षकों को रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, निर्माणाधीन भवन, ईंट भट्टों पर तैनात किया गया है।
विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलनरत मॉनिटरों में से एक अखिलेंद्र की हालत अचानक बिगड़ गई। मॉनिटर अखिलेंद्र को बेली अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया है।
आंदोलनरत साथी मॉनिटरों का आरोप है कि रीजनल टीम लीडर द्वारा अखिलेंद्र को धमकाया गया था। मामले की शिकायत सर्विलेंस मेडिकल ऑफिसर (एसएमओ) डॉ. नीरज सिंह से की गई है। दूसरी ओर टीम लीडर डॉ. हामिद सईद ने आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि मॉनिटर अखिलेंद्र को बातचीत के दौरान सिर्फ समझाया था। उल्लेखनीय है कि मॉनिटर्स विभिन्न मांगों को लेकर विगत दो दिनों से आंदोलनरत है और उन्होंने कार्य बहिष्कार कर रखा है। जिसका असर पल्स पोलियो अभियान की मॉनीटरिंग पर भी पड़ रहा है।