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अखाड़ा के रैपिड एक्शन फोर्स हैं ये नागा संन्यासी

Tue, 05 Feb 2013 05:30 AM IST
Allahabad
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महाकुंभ नगर। कुंभ मेले में विभिन्न अखाड़ों के नागा संन्यासियों को देश-दुनिया से आए लोग बेहद कौतूहल के साथ देखते हैं। लोगों को यही पता है कि ये संन्यासी वस्त्र त्यागने के बाद भभूत लगाकर साधना में लीन रहते हैं। बहुत हद तक यह बात सच भी है। मगर पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के नागा (निर्वाणी) संन्यासी कुछ अलग है। वे अपने अखाड़ा के लिए रैपिड एक्शन फोर्स या क्विक रिएक्शन टीम की तरह हैं। आकस्मिक घटना या जरूरत पर वे फौरन सक्रिय हो जाते हैं। रविवार शाम अखाड़े में मंदिर के गुंबद पर लगी आग को उन्होंने छत पर चढ़ जिस तेजी से काबू पाया, उसे देख सब दंग थे।
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श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन में प्रयाग महाकुंभ में 27 संतों ने गंगा तट पर निर्वस्त्र होकर आजीवन ब्रह्मचर्य की दीक्षा ली। इनमें 12 साल से 32 साल तक के नागा संन्यासी शामिल हैं। इस अखाड़े में तंगतोड़ा नागाओं को निर्वाणी कहा जाता है। घर-परिवार छोड़कर गुरू की शरण में वैराग्य अपनाने वाले संतों को गुरु की अनुमति पर दीक्षा मिलती है। कुंभ मेले के दौरान ये तंगतोड़ा नागा वेशभूषा में रहेंगे। फिर उन्हें अखाड़ा में कोई ओहदा मिल सकता है या जीवन भर नागा वेश में रहने का संकल्प ले सकते हैं। एक माह के तप के बाद वे अखाड़ा की भ्रमणशील जमात में शामिल हो जाएंगे। फिलहाल वे तप करते हुए अखाड़ा के रैपिड एक्शन फोर्स की भूमिका में हैं। वे अखाड़ा में किसी भी आपात स्थिति में राहत दल की तरह सक्रिय हो जाते हैं। उनकी चुस्ती-फुर्ती दंग करने वाली है। रविवार शाम मंदिर में आग लगी तो वे बेहत तेजी से गुंबद तक पहुंचे और दमकल दस्ते के आने से पहले आग बुझा ली। अखाड़ा के महंत सत्यनाम दास जी बताते हैं कि ये पुलिस की क्विक रिएक्शन टीम के जवानों से भी तेज हैं। उनमें गजब की इच्छा शक्ति और चपलता है। शाही स्नान के जुलूस में भी वे आगे-आगे चलते हैं। जरूरत पड़ने पर ये तंगतोड़ा संन्यासी अपनी जान की बाजी लगाने से भी कर्तई पीछे नहीं हटते।
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