महाकुंभ नगर। शीर्षस्थ सिद्धांतों को जनमानस के लिए श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र में अर्जुन को बताने के बहाने सामान्य जन को जीवन को ठीक ढंग से समझने, व्यवहार करने के लिए प्रेरित किया। आज यहां कुंभ में उसी सिद्धांत को जनसामान्य के लिए इस तरह धर्मगुरु प्रदान करें कि उसमें विश्व के मानव समाहित हो सकें। ये बातें यथार्थ गीता शिविर में श्री परमहंस स्वामी अड़गड़ानंद जी ने कहीं। उन्होंने कहा कि कुंभ मेले में सम्राट अशोक, कनिष्क, हर्ष, आदिशंकराचार्य जैसे महापुरुष तथा सम्मानित संत-महात्मा धर्म को परिमार्जित एवं परिभाषित कर उसके स्वरूप को और निखार देते हैं। उनकी ओर से प्रतिपादित धर्म कुंभ मेले में जुटे संत, गृहस्थों के साथ चारों दिशाओं में प्रसारित होते हैं।
उन्होंने कहा कि आज पुन: उसी तरह यथार्थ गीता के संदेश को कुंभ मेले में आए श्रद्धालुओं के माध्यम से घर-घर पहुंचाने की आवश्यकता है, जिससे विश्व पटल से रूढ़ियां, भ्रांतियां, कुरीतियां एवं आतंकवाद जैसी समस्याओं का निवारण हो सके।
वर्तमान में यथार्थ गीता 28 भाषाओं में उपलब्ध है। इसके साथ 18 भाषाओं में डीजिटल फॉर्म भी उपलब्ध है, जिसे डाउनलोड भी किया जा सकता है। हिन्दी, अंग्रेजी सहित आठ भाषाओं में आडियो सीटी भी उपलब्ध है। राजस्थान में इसे एफएम पर भी प्रसारित किया जा रहा है। रविवार को संवाददाताओं से बातचीत में श्री परमहंस आश्रम के स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज ने यथार्थ गीता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि गीता क्या है, यह आज तक स्पष्ट नहीं है। गीता का आज तक कोई सही उल्लेख नहीं कर सका लेकिन यथार्थ गीता में इसका समाधान मिल जाएगा। उन्होंने कहा कि महाकुंभ से देशहित और विश्व शांति के लिए निर्णायक संदेश जाना चाहिए।