इलाहाबाद। कोहरे और कड़कड़ाती ठंड ने रेल यात्रियों के लिए सफर मुश्किल कर दिया है। खिड़कियों के सही न होने के कारण कोच के अंदर पहुंच रही तीखी हवा सुई की तरह चुभ रही है। रात के वक्त रजाई और कंबल भी यात्रियों के काम नहीं आ रहे हैं। तन ढकने के तमाम जतन करने के बाद भी यात्री परेशान हैं। उधर, सोमवार को महाबोधि एक्सप्रेस, मेरठ से आने वाली संगम रद रहीं।
कोहरे में फंसी ट्रेनें अब दूसरे दिन पहुंचने लगी हैं। महानंदा एक्सप्रेस 20 घंटे, पुरुषोत्तम एक्सप्रेस 23 घंटे, सीमांचल 22 घंटे, महानगरी 14 घंटे, चंबल एक्सप्रेस नौ घंटे, पूर्वा एक्सप्रेस आठ घंटे देरी से चलीं। देर से पहुंचने के कारण तुलसी एक्सप्रेस पौने चार घंटे, झांसी पैसेंजर सवा चार घंटे और कानपुर पैसेंजर सवा छह घंटे की देरी से जंक्शन से रवाना हुईं। लेटलतीफी को बताने वाली यह संख्या मामूली है। प्रयाग एक्सप्रेस, संगम, मथुरा एक्सप्रेस, सरयू, कानपुर इंटरसिटी, लखनऊ इंटरसिटी, सभी राजधानियां घंटों की देरी से इलाहाबाद पहुंचीं। मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के स्लीपर कोचों और जनरल कोच में सफर कर रहे यात्रियों की शिकायत है कि खिड़कियां सही तरीके से बंद नहीं हो रही हैं। शीशा और खिड़की बंद करने के बाद भी हवा अंदर आ रही है। इस कारण लोअर बर्थ और मिडिल बर्थ पर बैठने और लेटने वाले यात्रियों को दिन के वक्त भी सफर करना मुश्किल हो गया है। दिन में ही रजाई ताननी पड़ती है। रात के वक्त रजाई और कंबल भी काम नहीं कर रहे हैं। इसके कारण यात्रियों को बीच रास्ते में ही उल्टी और दस्त जैसी शिकायतें होने लगी हैं।