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पानी छोड़ने के बाद भी गंगा काली

Tue, 08 Jan 2013 05:30 AM IST
Allahabad
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विजय सक्सेना
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इलाहाबाद। साफ और प्रदूषण मुक्त गंगा जल में स्नान की मंशा लेकर संगम पहुंचने वाले स्नानार्थियों, कल्पवासियों, साधु संतों को निराशा हो सकती है। गंगा जल की जो स्थिति है, उससे यह आशंका बढ़ गई है कि स्नानार्थी, साधु संत, अखाड़े सब काले पानी में ही स्नान करेंगे। साफ और अधिक पानी के लिए कोशिशें जारी हैं लेकिन उसका नतीजा फिलहाल नजर नहीं आ रहा। केंद्र सरकार के हस्तक्षेप पर पिछले 22 दिनों से नरौरा से प्रतिदिन 2500 क्यूसेक पानी छोड़े जाने का दावा किया जा रहा है लेकिन इसके बाद भी गंगा में पानी का रंग अब तक काला है। नाले का पानी अब भी सीधे गंगा में जा रहा है, जिसकी वजह से उसमें बीओडी (बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड) की मात्रा कम नहीं हो रही है। पानी साफ होने की उम्मीद इसलिए कम है क्योंकि अर्द्धकुंभ के बाद से लगातार गंगाजल प्रदूषित ही होता चला गया। साल दर साल बढ़ते बढ़ते गंगाजल में प्रदूषण का मानक अर्द्धकुंभ के मुकाबले डेढ़ गुना हो गया है।
प्रदूषण विभाग के आंकड़े कह रहे हैं कि पिछले सात वर्ष में कभी भी गंगा जल स्नान के योग्य नहीं रहा। गंगा में स्नान के लायक पानी तभी माना जाता है जब उसमें बीओडी की मात्रा तीन मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक न हो लेकिन वर्तमान में यह 4.8 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पहुंच गया है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक तो गंगा में 2006 से अब तक कभी भी पानी नहाने लायक नहीं रहा। इसी का नतीजा है कि तमाम कोशिशों के बाद भी संगम पर काला पानी दिख रहा है।
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सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता जेपी वर्मा का कहना है कि नरौरा से छोड़ा जा रहा पानी संगम तक पहुंचने लगा है। हालांकि उन्होंने इस पर बोलने से इंकार कर दिया कि इसके बाद भी गंगा का पानी काला क्यों है। प्रदूषण नियंत्रण इकाई के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ.मोहम्मद सिकंदर का दावा है कि शाही स्नान के पहले गंगा में बीओडी की मात्रा स्नान के लायक हो जाएगी।
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गंगा में अब भी गिर रहा नाले का पानी
पानी का रंग काला होने के पीछे मुख्य रूप से नाले जिम्मेदार हैं। इलाहाबाद में पांच सीवरेज ट्रीटमेंट प्लाट चालू किए गए हैं। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई की तरफ से राजापुर में बनवाए गए 60 एमएलडी के एसटीपी में से 30 एमएलडी पानी का ट्रीटमेंट हो रहा है। पोंगहट में 10, कोडरा में 25 और सलोरी एसटीपी से 29 एमएलडी पानी का ट्रीटमेंट हो रहा है, जबकि नैनी में पुराने एसटीपी क्षमता बढ़ाने के बाद 80 एमएमडी गंदे पानी का ट्रीटमेंट कर के गंगा-यमुना में छोड़ा जा रहा है। समाजसेवी कमलेश सिंह का दावा है कि इसके बाद भी राजापुर, सलोरी, बघाड़ा, दारागंज, झूंसी, फाफामऊ, कालिंदीपुरम, करेली आदि में नाले से 60 से 80 एमएलडी पानी अब भी सीधे गंगा-यमुना में गिर रहा है। नरौरा का पानी संगम पर पहुंचने के बाद भी रंग में कोई सुधार न देख डीएम राजशेखर ने गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई को निर्देश दिया है कि किसी भी हाल में 10 जनवरी तक नालों का गंदा पानी गंगा में गिरने पर रोक लगाई जाए लेकिन स्थितियां कह रही हैं कि ऐसा होना मुश्किल है।
पिछले सात वर्ष में गंगा में दिसंबर-जनवरी में बीओडी की मात्रा
वर्ष बीओडी (प्रतिलीटर मिलीग्राम में)
2006 3.3
2007 3.1
2008 3.5
2009 3.2
2010 4.5
2011 3.7
2012 4.8
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