इलाहाबाद। जाने-माने रंगकर्मी प्रणव भट्टाचार्य की बुधवार को सड़क हादसे में मौत हो गई। 51 वर्षीय प्रणव दा स्कूटर से गोविंदपुर में पूजा कराकर लौट रहे थे। शिवकुटी में मजार तिराहे पर बस ने स्कूटर को रौंद दिया। हादसे में प्रणव भट्टाचार्य गंभीर रूप से जख्मी हुए। उन्हें एसआरएन अस्पताल ले जाया गया जहां उनकी मौत हो गई। हादसे के बाद चालक बस छोड़कर निकल भागा। नाट्यकर्मी प्रणव भट्टाचार्य की मौत की खबर पाकर तमाम रंगकर्मी और साहित्य जगत से जुड़े लोग अस्पताल पहुंच गए। उनकी पत्नी और बेटे भी अस्पताल में बिलखते रहे।
कर्नलगंज में रहने वाले प्रणव भट्टाचार्य शहर के मशहूर रंगकर्मी थे। वे सामानांतर रंग मंडल के ग्रुप लीडर होने के साथ ही बंगाली सोशल एवं कल्चरर एसोसिएशन एवं निखिल भारत बंग साहित्य के कोषाध्यक्ष थे। सीआईटीयू (ट्रेड यूनियन) के नेता प्रणव भट्टाचार्य पुरोहित थे, वह घर-घर पूजा को जाते थे। बुधवार की शाम वह पूजा कराने गोविंदपुर गए थे। वहीं से लौटते वक्त चैथम लाइन के पास मजार तिराहे पर इफ्को से जुड़ी बस ने स्कूटर में जोरदार टक्कर मार दी। भीषण टक्कर में प्रणव सड़क पर गिरे और सिर में चोट लगने से अधिक खून बह गया। आसपास के लोग उन्हें एसआरएन अस्पताल ले गए जहां उनकी मौत हो गई। खबर पाकर पहुंची शिवकुटी पुलिस ने बस को कब्जे में ले लिया। प्रणव भट्टाचार्य की मौत से साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई। विधायक अनुग्रह नारायण सिंह समेत तमाम रंगकर्मी और संस्था से जुड़े लोग अस्पताल पहुंच गए।
पत्नी-बच्चों का बुरा हाल
इलाहाबाद। एसआरएन अस्पताल में प्रणव भट्टाचार्य
का शव देख बड़ा बेटा अभिनय बिलख पड़ा। इसी साल अभिनय ने बीएसएच से इंटर किया है। प्रणव का छोटा बेटा निलाद्री होली टिनिट्री में कक्षा पांच का छात्र है। पत्नी ममता भट्टाचार्य मौत की खबर पाकर बेसुध हो गईं। प्रणव भट्टाचार्य तीन भाइयों प्रशांत और प्रवीण में छोटे थे। अस्पताल गेट पर परिवार के लोग रोते बिलखते रहे।
हेलमेट छूटा तो टूटी जिंदगी की डोर
इलाहाबाद। प्रणव भट्टाचार्य स्कूटर पर हमेशा ही हेलमेट लगाते थे। उम्रभर उन्होंने हेलमेट का साथ नहीं छोड़ा। बुधवार को वह पहली बार हेलमेट घर भूल गए। हेलमेट का छूट जाना जिंदगी की डोर ही तोड़ गया। सिर में गंभीर चोट लगने से उनकी मौत हो गई। हेलमेट होता तो शायद जान बच जाती।
लापरवाही से अस्पताल में टूट गया दम
इलाहाबाद। प्रणव भट्टाचार्य की मौत के बाद साहित्य जगत से जुड़े लोगों में अस्पताल की व्यवस्था के खिलाफ काफी आक्रोश था। संस्था से जुड़ी चंदना घोष का कहना है कि लापरवाही की वजह से उनकी जान गई। हादसे के बाद कुछ देर तक प्रणव दा वहीं पड़े रहे। किसी ने भी अस्पताल नहीं पहुंचाया। तत्काल एंबुलेंस पहुंचने की व्यवस्था होती थी ज्यादा खून न बहता। रीता समद्दार का कहना है कि अस्पताल में पहुंचने तक वह बात कर रहे थे। यहां भी लापरवाही हुई। बाद में उन्हें कृति रेफर किया जाने लगा। यहीं इलाज की व्यवस्था होती थी जान बच जाती।