इलाहाबाद। लोकसभा चुनाव को लेकर राष्ट्रीय स्तर की दो बड़ी पार्टियों कांग्रेस और भाजपा ने पत्ते नहीं खोले लेकिन टिकट को लेकर सपा, बसपा की तेजी ने सियासी हलचल तेज कर दी है। सपा ने सबसे पहले दांव मारते हुए उम्मीदवारों के नाम घोषित किए तो बसपा ने भी अपने पत्ते खोलने शुरू कर दिए, मानो पार्टी सपा के पहल का इंतजार कर रही थी। मंगलवार को बसपा ने सांसदों, विधायकों, जोनल स्तर के पदाधिकारियों के साथ बैठक की और सपा उम्मीदवारों के लिए जाल बिछा दिया।
बसपा ने इलाहाबाद संसदीय सीट से केशरी देवी को लड़ाने का फैसला किया है जबकि फूलपुर से सांसद कपिलमुनि करवरिया को दोबारा टिकट देने की घोषणा की गई। कपिल का टिकट लगभग तय माना जा रहा था लेकिन केशरी देवी को मैदान में उतार बसपा ने अपनी रणनीति साफ कर दी है। दो बार से सांसद कुंवर रेवती रमण सिंह की घेराबंदी के लिए बसपा ने सधी चाल चली है। केशरी देवी को टिकट मिलने का असर फूलपुर, कौशांबी और प्रतापगढ़ की कई सीटों पर भी पड़ेगा।
सपा सांसद रेवतीरमण अपने गढ़ करछना, मेजा, कोरांव में काफी दमदार माने जाते हैं। विधानसभा चुनाव में करछना से उनके बेटे उज्ज्वल की हार से लोगों का मनोबल कमजोर जरूर हुआ लेकिन इसके बावजूद यमुनापार में रेवती की ताकत कम नहीं हुई। मेजा में उन्होंने अपने मनचाहे उम्मीदवार को टिकट दिलाया और उसे जीताकर दिखाया। अबकी विधानसभा चुनाव में इलाहाबाद संसदीय सीट से जुड़ी दो अन्य सीटों बारा और शहर दक्षिणी से भी सपा ही जीती। सपा का समीकरण साफ है कि विधानसभा चुनाव की तरह रणनीति बनाकर सीट निकालेंगे लेकिन बसपा का दांव उनके लिए भारी पड़ सकता है।
विधानसभा चुनाव में केशरी देवी के बेटे दीपक पटेल ने रेवती रमण के बेटे उज्ज्वल को उनके घर में हराया। माना जा रहा है कि यह जीत केशरी देवी की ही रणनीति का नतीजा थी। इसके अलावा बारा, मेजा, कोरांव में पटेलों की संख्या काफी है। बसपा के परंपरागत वोटरों के अलावा पटेल वोटर साथ हो गए तो नतीजे कुछ भी हो सकते हैं।
केशरी देवी के कारण फूलपुर में भी कुछ पटेल वोटर बसपा के साथ हो सकते हैं। सपा ने पटेल वोट बटोरने की जुगत में ही धर्मराज को टिकट दिया लेकिन यदि केशरी देवी का दांव चला तो कपिल को ज्यादा मुश्किल नहीं होगी। फूलपुर क्षेत्र की पांच विधानसभा सीटों में से तीन सोरांव, फाफामऊ, फूलपुर पर सपा का कब्जा है जबकि केवल शहर पश्चिमी की सीट बसपा के हाथ लगी। शहर उत्तरी सीट कांग्रेस के खाते में गई। चार सीटों पर हार के बाद भी बसपा बहुत पीछे नहीं रही। सपा हो या कांग्रेस, उसे टक्कर बसपा से ही मिली। इस संसदीय क्षेत्र की सभी सीटों पर पटेल काफी अधिक हैं। इसके अलावा कपिल को ब्राह्मण वोट भी मिलते हैं। जाहिर है कि बसपा के परंपरागत वोटरों के साथ ये वोट जुड़े तो सपा का गणित उलझ सकता है।
जिम्मेदारी संभालने की नसीहत
चुनाव में जातीय गणित बड़ा असर करेगी, यह सभी को पता है। इसी के मद्देनजर बसपा ने मंगलवार को राजर्षि टंडन मंडपम में आयोजित बैठक में भाईचारा समितियों तथा नेताओं को नसीहत दी। जोनल क्वार्डिनेटर डॉ.विजय प्रताप ने कहा कि सभी विधायक, विधानसभा प्रभारी और पदाधिकारी अपनी जिम्मेदारी संभाल लें। चुनाव तैयारियों में कोई गड़बड़ी दिखी तो किसी को माफ नहीं किया जाएगा। ड.अशोक सिद्धार्थ और गुरु प्रसाद ने भाईचारा समितियों को ज्यादा सक्रिय भूमिका निभाने को कहा। बैठक में केशरी देवी, कपिलमुनि करवरिया, अभिलाषा गुप्ता, सूरजभान, राजबली जैसल, कलेक्टर पांडेय, मुज़तबा सिद्दीकी समेत बड़ी संख्या में नेता, पदाधिकारी मौजूद रहे।