इलाहाबाद। विवादों की वजह से छह साल बाद हुआ पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ का चुनाव अव्यवस्थाओं के बीच संपन्न हुआ। उच्च प्राथमिक विद्यालय मुट्ठीगंज में चुनाव के दौरान संघ द्वारा निर्धारित नियमों का उल्लंघन भी किया गया। स्कूल के गेट से लेकर पोलिंग बूथ के बाहर तक प्रत्याशी और उनके समर्थक पर्चे बांटते रहे। ऐसा खुला प्रचार हुआ, जिससे वोटरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वहीं व्यवस्था में लगे शिक्षक संघ के सदस्य बार-बार ऐसा न करने की हिदायत देते रहे, लेकिन प्रत्याशी और उनके समर्थक बाज नहीं आए।
निशान लगे मतपत्र की फोटोकॉपी बांटी
स्कूल गेट से लेकर पोलिंग बूथ की कुछ दूरी तक प्रत्याशी और उनके समर्थक मतपत्र की फोटोकॉपी बांटते नजर आए। उन्होंने फोटोकॉपी पर सभी 18 पदों के प्रत्याशियों के नामों के आगे टिक लगा दिया था, जिसे देखकर उन्हें असली मतपत्र पर निशान लगाना था। इस तरह की शिकायतें चुनाव की देखरेख में लगे शिक्षकों के पास पूरे दिन आती रहीं। सदस्यों द्वारा प्रत्याशियों से ऐसा न करने का अनुरोध लगातार किया जाता रहा।
शिक्षकों के नाम मतदाता सूची से गायब
चुनाव के दौरान काफी संख्या में ऐसे शिक्षक पहुंचे जिनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं था। कई शिक्षकों ने आरोप लगाया कि प्रत्याशियों और उनके समर्थकों ने उनसे सदस्यता अभियान के तहत सदस्यता शुल्क तो ले लिया लेकिन लिस्ट में उनका नाम नहीं जोड़ा गया।
बंद रहे सभी उच्च प्राथमिक स्कूल
शिक्षक संघ के चुनाव की वजह से ग्रामीण क्षेत्र के ज्यादातर पूर्व माध्यमिक विद्यालय बंद रहे। चुनाव में शामिल होने के लिए अवकाश बीएसए की ओर से पहले से ही स्वीकृत था। वोट देने के लिए शिक्षकों के पहुंचने का सिलसिला सुबह से ही शुरू हो गया था। वोटिंग सुबह 8.30 बजे शुरू की गई। भीड़ को देखते हुए वोटिंग की समयावधि को बढ़ाकर दो के बजाए ढाई बजे किया गया। वोटिंग के बाद देर शाम काउंटिंग भी शुरू हो गई। मुट्ठीगंज स्थित विद्यालय की दीवारों को प्रत्याशियों और उनके समर्थकों ने पोस्टरों से पाट दिए थे। इससे स्कूल की दीवारें खराब हो गईं। इस बारे में मंडलीय महामंत्री दिलीप कुमार सिंह का कहना था कि जानकारी के लिए मतपत्र की फोटोकॉपी दीवार पर लगाई थी, जिससे वोटरों को कोई दिक्कत न हो। लेकिन प्रत्याशियों और समर्थकों ने इसका गलत इस्तेमाल किया। संघ की ओर से लगातार उन्हें ऐसा न करने के लिए कहा जाता रहा।