इलाहाबाद। कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को पंचदशनाम जूना अखाड़ा के संतों ने नगर प्रवेश के साथ नई परंपरा की नींव रखी। पेशवाई से पहले ही रविवार को पहली बार पेशवाई जैसी शोभायात्रा में जूना के संतों ने नगरवासियों को दर्शन दिया। हरिद्वार से चलकर संतों का काफिला दोपहर में तेलियरगंज पहुंचा।
तेलियरगंज में ही खिचड़ी भोग के बाद जूना के रमता पंचों की शोभायात्रा में ज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती और काशीसुमेरू पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती सहित जूना के महामंत्री महंत हरिगिरि, सचिव महंत प्रेमपुरी, सचिव महंत प्रेमगिरि, सचिव महंत विद्यानंद सरस्वती भी शामिल हुए।
हाथी, घोड़ा सहित निकली शोत्रायात्रा की अगुवाई जूना के आराध्य भगवान दत्तात्रेय के विग्रह और प्रतिनिधि त्रिशूल ने की। शोभायात्रा में तकरीबन दो दर्जन रथनुमा गाड़ियों पर शंकराचार्यों के अतिरिक्त पंचकूला के महामंडलेश्वर स्वामी पंचानंद गिरि, हरियाणा के बालकपीठाधीश्वर महंत पृथ्वी गिरि, निर्वाणी अनी के महंत धर्मदास सहित अनेक विशिष्ट संत-महात्मा विराजमान थे।
जूना के रमता पंच के पहले तेलियरगंज और फिर मौजगिरि मंदिर पहुंचने पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच परंपरागत रूप से अखाड़े के सचिवों, संतों, श्रद्धालुओं के साथ ही मेला प्रशासन की ओर से अपर मेलाधिकारी सतीश शर्मा और सीओ ट्रैफिक शैलेंद्र सिंह ने परंपरागत रूप से स्वागत किया।
शुभता लेकर आए रमता पंच
इलाहाबाद। ज्योतिर्विदों ने जूना के रमता पंचों के नगर प्रवेश को शुभतादायक बताया है। भारतीय ज्योतिष परिषद के महामंत्री आचार्य अविनाश के मुताबिक दोपहर पौने बारह से सवा बारह के बीच रमता पंचों ने नगर प्रवेश किया। उस समय मकर लग्न का संचरण हो रहा था, जिसका स्वामी ग्रह शनि अपनी उच्च राशि से सूर्य के साथ रहा। इसके प्रभाव से साधना और तपस्या को उच्चता प्राप्त होगी। वहीं शासन-प्रशासन और संतों के बीच समन्वय भी बेहतर होगा।
‘‘पेशवाई जैसी शोभायात्रा के रूप में जूना अखाड़े के रमता पंचों, संतों का नगर प्रवेश नई परंपरा की शुरुआत, पर स्वागतयोग्य है।’’
महंत दुर्गादास
प्रवक्ता, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद