इलाहाबाद। हाईकोर्ट के पास पोलो मैदान पर शनिवार को रिमोट से संचालित ऐरोप्लेन के एक छोटे मॉडल ने जैसे ही उड़ान भरी, बच्चे उसे पकड़ने के लिए दौड़ पड़े। वहां मौजूद हर बच्चे की ख्वाहिश थी कि खिलौने की तरह दिखने वाले इस हवाईजहाज को एक बार छू लें। लगभग पंद्रह मिनट तक बच्चे, बुजुर्ग और युवा आसमान की ओर ताकते रहे। हवा में कलाबाजियां खाता विमान का मॉडल असमान में उड़ते परिंदों के बीच इधर-उधर घूमता रहा और बच्चे तालियां बजाते रहे। बच्चों के लिए सबसे रोमांचकारी रहा सेना के टैंक पर बैठकर घूमना। टैंक पर बैठे बच्चों को देखकर ऐसा लगा कि मानो उनकी मनचाही मुराद पूरी हो गई। रविवार को भी सुबह साढ़े नौ से दोपहर एक बजे तक प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा।
मौका था, सेना की रेड ईगल डिवीजन की तरफ से आयोजित ‘अपनी सेना को जानो’ विषय पर आधारित प्रदर्शनी का, जिसमें आम शहरियों ने भी बढ़चढ़ कर भागीदारी की और घुड़सवारी करते, हेलीकॉप्टर पर लटकती रस्सी को पकड़कर हवा में झूलते, एक-दूसरे पर चढ़कर पिरामिड बनाते और कलाबाजियां खाते सेना के जवानों की वीरता के साक्षी बने। पैरा मोटर ग्लाइडिंग, ऐरो मॉडल, घुड़सवारी और हेलीकॉप्टर के रोमांचकारी प्रदर्शन ने दर्शकों को पलक झपकाने तक का मौका नहीं दिया तो ब्रास बैंड, पाइप बैंड पर बजाई गईं देशभक्ति की धुनों ने पूरे माहौल में वीरता का रस घोल दिया। मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति शिवकीर्ति सिन्हा ने वहां लगाए गए विभिन्न स्टॉल्स का अवलोकन किया तो रेड ईगल डिवीजन के जनरल अफसर कमांडिंग मेजर जनरल जीएस चंदेल ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया। मुख्य अतिथि ने कहा कि यह मेला सेना को करीब से जानने का एक अच्छा जरिया है। यहां आकर मालूम हुआ कि सेना किस तरह से पूरे अनुशासन के साथ देश की सीमाओं की सुरक्षा कर रही है।
सम्मानित किए गए सेवानिवृत्त सैनिक
प्रदर्शनी के दौरान सेवानिवृत्त सैनिकों और वीर नारियों को सम्मानित किया गया। साथ ही 1965 के युद्ध में गैलेंट्री अवार्ड विजेता सूबेदार मेजर ऑनरेरी कैप्टन रामानंद का भी सम्मानित किया गया। इसके अलावा पैरा मोटर ग्लाइडिंग टीम के कैप्टन हवलदार डीडी यादव, हॉर्सराइडिंग टीम के कैप्टन आरएस प्रसाद सहित प्रदर्शनी में हरतअंगेज दिखाने और ब्रास बैंड, पाइप बैंड पर धुन बजाने वाले वाले हर टीम के कैप्टन को सम्मानित किया गया।
मेडिकल, पेंशन से जुड़ी समस्याएं हुईं दूर
सैनिकों की मेडिकल संबंधी समस्याओं के निराकरण के लिए प्रदर्शनी में ईसीएचएस और पेंशन संबंधी समस्याओं के निराकरण के लिए सीडीए पेंशन कार्यालय का स्टाल भी लगाया गया। इन स्टॉलों पर बड़ों की भीड़ जुटी थी तो दूसरी तरफ चाट, चाउमीन जैसे लजीज व्यंजनों के स्टॉलों पर बच्चों और महिलाओं की लाइन लगी रही।
बोफोर्स, इंसास राइफल के ईदगिर्द घूमते रहे युवा
सेना की इस प्रदर्शनी में कई आधुनिक हथियारों का भी प्रदर्शन किया गया। वहां मौजूद सेना के जवानों ने युवाओं की जिज्ञासा को शांत करते हुए जब बताया कि बोफोर्स तोप की मार 39.9 किलोमीटर तक है और इसके एक गोले का वजह 42.6 किलोग्राम है, जो 50 मीटर की दूरी तक रह चीज को तहस-नहस कर सकता है तो युवाओं की आंखें खुली की खुली रह गई। प्रदर्शनी में युवाओं को सेना में शामिल होने को प्रेरित करने के लिए कई स्टाल भी लगाए गए थे।
हर वक्त निगरानी में सीमा पार बैठे दुश्मन
सेना की प्रदर्शनी में रखे लांग रेंज रेकी ऐंड ऑब्जर्वेशन सिस्टम एवं उसकी कट्रोल यूनिट के बारे में सेना के जवानों ने युवाओं विस्तार से जानकारी दी। इस सिस्टम के जरिये दिन में 15 किलोमीटर और रात के वक्त 10 किलोमीटर की दूरी तक किसी प्रकार की गतिविधि को आसानी से कंट्रोल यूनिट की स्क्रीन में देखा जा सकता है। इसी तरह थर्मल इमेजिंग इंटीग्रेटेड आब्जर्वेशन इक्वीपमेंट का भी प्रदर्शन किया गया, जिसके जरिये 80 मीटर से 20 किलोमीटर की दूरी तक दूरबीन पर दुश्मनों की हर एक गतिविधि को आसानी से देखा जा सकता है। प्रदर्शनी में आए युवाओं को भी इस दूरबीन से देखने का मौका मिला। सेना के डिजिकोरा मेट सिस्टम का भी प्रदर्शन किया गया। इसका एक हिस्सा रेडिया साउंडिक कहलाता है, जो फिनलैंड का बना है। इसे गुब्बारे में बांध कर हवा में छोड़ दिया जाता है और यह 20 किलोमीटर की दूरी तक हवा का रुख, उमस का स्तर सहित मौसम की पूरी जानकारी सेना को देता है। ऐसे में तोप से गोला दागते वक्त मौसम का सटीक पूर्वानुमान दुश्मनों के खात्मे के लिए काफी है।