कोर्ट की अवमानना में दो दरोगाओं को जेल
0 एक-एक हजार रुपये जुर्माना भी लगा, सुप्रीमकोर्ट में अपील की मिली मोहलत
प्रयागराज। अदालत के आदेश की अवहेलना करने पर हाईकोर्ट ने दो उपनिरीक्षकों को अवमानना में एक माह और 15 दिन के कारावास तथा एक-एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। कोर्ट ने इन दोनों को अपने आदेश के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट में अपील दाखिल करने की मोहलत देते हुए एक माह तक के लिए सजा के अमल पर रोक भी लगाई है। प्रकरण फिरोजाबाद के शिकोहाबाद थाने और शाहजहांपुर के कटरा थाने का है। अवमानना याचिकाओं पर न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने सुनवाई की।
फिरोजाबाद का प्रकरण
अवमानना याचिका रामपाल ने दाखिल की थी। याची ने अपनी पसंद से शादी की थी, जिसके चलते लड़की के परिजनों ने उस पर अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था। रामपाल और अंजू ने हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट ने मामले में पुलिस रिपोर्ट दाखिल होने तक दोनों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। इसके बावजूद शिकोहाबाद थाने में तैनात दरोगा अशोक कुमार ने अंजू (याची से विवाह करने वाली लड़की) को गिरफ़्तार कर लिया। बिना कोर्ट की अनुमति के उसकी गिरफ्तारी पॉक्सो एक्ट में दिखा दी। फिर अदालत के आदेश से बचने के लिए खुद अदालत का सहारा लेने की कोशिश की।
दस्तावेजों को देखने से पता चला कि अंजू बालिग है। पॉक्सो एक्ट में भी बयान दर्ज हुआ कि याची 19 वर्ष की है और अपनी मर्जी से शादी की है। यह साबित पाया गया कि दरोगा को हाईकोर्ट के आदेश की जानकारी थी इसके बावजूद उसने गिरफ्तारी की। इस पर हाईकोर्ट ने उसे अवमानना का दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है।
शाहजहांपुर का मामला
शाहजहां पुर के कटरा थाने में तैनात दरोगा विनीत मलिक को कोर्ट ने अवमानना में 15 दिन के कारावास और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अवमानना याचिका अर्जुन सिंह मौर्य ने दाखिल की थी। अर्जुन ने अपनी पसंद से विवाह किया था जिसके चलते लड़की के परिजनों ने उस पर अपहरण का मुकदमा दर्ज करा दिया। मुकदमे में गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। कोर्ट ने पुलिस रिपोर्ट पेश होने तक याचीगण के खिलाफ उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी। जांच तीन माह में पूरी करने का आदेश दिया। इसके बावजूद दरोगा ने याची को गिरफ्तार कर लिया। विनीत मलिक ने बिना शर्त माफी मांगी और कहा कि चार साल से पुलिस सेवा में है। कोर्ट का आदेश समझने में गलती हो गई। मगर अदालत ने उनको जानबूझकर कोर्ट की अवमानना का दोषी माना। दरोगा की सफाई को असंतोषजनक मानते हुए सजा सुनाई है। दोनों मामलों में एक माह तक सजा के अमल पर रोक रहेगी ताकि यदि दोनों दरोगा चाहें तो हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीमकोर्ट में चुनौती दे सकें ।