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बेवजह नोटिस भेजने पर माना जाएगा व्यापारी का उत्पीड़न

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बेवजह नोटिस भेजने पर माना जाएगा व्यापारी का उत्पीड़न
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0 वित्तीय वर्ष 2015-16 के कर निर्धारण के मामलों में रिटर्न की चयन के आधार पर हो रही है स्क्रूटनी
0 बिना कारण नोटिस भेजने पर अफसरों के खिलाफ होगी कार्रवाई, 30 नवंबर तक पूरा करना होगा कर निर्धारण
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। कर निर्धारण के मामलों में रिटर्न की स्क्रूटनी के दौरान व्यापारियों को बेवजह नोटिस जारी करना वाणिज्य कर विभाग के अफसरों को महंगा पड़गा। बिना पर्याप्त एवं उचित आधार के नोटिस जारी करने पर उसे व्यापारी का उत्पीड़न माना जाएगा और इसके लिए अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। मुख्यालय में इस तरह की लगातार आ रहीं शिकायतों के बाद वाणिज्य कर कमिश्नर ने यह आदेश जारी किया है।
इन दिनों वित्तीय वर्ष 2015-16 के ऐसे मामलों में चयन के आधार पर कर निर्धारण की प्रक्रिया चल रही है जिन व्यापारियों का सालाना टर्नओवर 50 लाख से कम है। इसके तहत जिन व्यापारियों ने 2015-16 के लिए वार्षिक विवरण फॉर्म-52, 52ए, 52बी 31 जनवरी 2017 तक दाखिल किया है, उन्हीं में से रिटर्न का चयन किया जाना है। कमिश्नर मुकेश कुमार मेश्राम ने दो दिन पहले जारी आदेश में स्पष्ट किया है कि कर निर्धारण अधिकारी कार्यालय में तैनात डिप्टी कमिश्नर प्रतिदिन एक, असिस्टेंट कमिश्नर दो तथा वाणिज्य कर अधिकारी प्रतिदिन छह रिटर्न की विस्तृत स्क्रूटनी करेंगे। इसमें आवश्यकता और स्पष्ट आधारों पर नियम 45(13) का नोटिस जारी किया जाएगा।
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उन्होंने कहा है किसी भी मामले में अनावश्यक नोटिस न जारी किया जाए। भविष्य में यह पता चला कि किसी अधिकारी ने बिना पर्याप्त एवं उचित आधार के कोई नोटिस जारी किया है तो यह मानते हुए कि उसने व्यापारी का उत्पीड़न किया है, उसी हिसाब से कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ नोटिस जारी करने वाले मामलों में प्रत्येक दशा में नोटिस तामीली की तिथि से 15 दिन के भीतर डीम्ड की कैटेगरी में रखने अथवा उससे बाहर करने का निर्णय लेना होगा। उन्होंने 31 जनवरी तक दाखिल रिटर्न के मामलों का निस्तारण हर हाल में 30 नवंबर तक करने का निर्देश दिया है।
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