इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ब्लड कैंसर से जूझ रहे दो माह के बच्चे को खून चढ़ाने के लिए नौ हजार रुपये वसूलने पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने निजी अस्पताल को आयुष्मान योजना से भी बाहर करने के राज्य सरकार के फैसले पर अपनी मुहर लगा दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने मुरादाबाद के सर्जिमेड हॉस्पिटल की याचिका पर दिया है। मामले के अनुसार, अस्पताल को 18 जून 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। कार्रवाई के आदेश में कहा गया कि बच्चे को खून चढ़ाने की प्रक्रिया का विवरण इलाज करने वाले डॉक्टर ने बेड हेड टिकट में दर्ज नहीं किया था। गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में भर्ती मरीज के उपचार के दौरान यह विवरण दर्ज करना अनिवार्य था। अस्पताल की ओर से समिति के समक्ष पेश हुए डॉक्टर ने भी प्रक्रियागत चूक स्वीकार की थी। कोर्ट ने कहा कि राज्य पैनल समिति के आदेश में भले ही कारणों का विस्तार से उल्लेख नहीं था, लेकिन इससे रिकॉर्ड पर सामने आए तथ्यों का महत्व कम नहीं हो जाता। उपलब्ध सामग्री से योजना लागू करने और उसके तहत उपचार के दौरान जरूरी प्रोटोकॉल का पालन करने में अस्पताल की ओर से गंभीर कमियां प्रथम दृष्टया सामने आई हैं।