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High Court : 38 साल पुराने हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा 82 वर्षीय बुजुर्ग बरी

Thu, 04 Dec 2025 04:48 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 38 साल पुराने हत्या के मामले में ट्रायल कोर्ट से आजीवन कारावास की सजा पाए 82 वर्षीय बुजुर्ग को बरी कर दिया है। यह फैसला न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति संजीव कुमार की खंडपीठ ने दिया है।
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अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 38 साल पुराने हत्या के मामले में ट्रायल कोर्ट से आजीवन कारावास की सजा पाए 82 वर्षीय बुजुर्ग को बरी कर दिया है। यह फैसला न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति संजीव कुमार की खंडपीठ ने दिया है।

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बुलंदशहर के अहमदगढ़ थाने के सतबारा गांव में 10 फरवरी 1985 की रात रामजी लाल के घर में विजेंद्र (वीरेंद्र), ओंकार और अजब सिंह उर्फ बाली घुस गए। इसके बाद ओंकार और बाली ने रामजी लाल के भतीजे राजेंद्र को पकड़ लिया। वीरेंद्र ने कट्टे से राजेंद्र को गोली मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। ट्रायल कोर्ट ने दो दिसंबर 1987 को वीरेंद्र, ओंकार, अजब सिंह उर्फ बाली को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई तो याचियों ने उसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।

हाईकोर्ट में अपील पर सुनवाई के दौरान वीरेंद्र और अजब सिंह उर्फ बाली की मृत्यु होने के कारण उनके खिलाफ अपील खारिज कर दी गई थी। इसलिए केवल ओंकार की अपील पर सुनवाई की गई। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पाया कि घटना रात की थी और प्राथमिकी सुबह दर्ज कराई गई। देरी का कोई उचित कारण नहीं बताया गया। गवाह परिवार के सदस्य हैं और उनके बयान में विरोधाभास था। इस पर कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन पक्ष संदेह से परे अपना मामला साबित करने में विफल रहा है। 

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