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हजारों बीघे की फसल उजाड़ी

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करछना क्षेत्र की चार हजार बीघे सरकारी जमीन को प्रशासन ने भूमाफिया के कब्जे से मुक्त करा लिया। इस दौरान सैकड़ों बीघे बोई गई परवल की फसल को उजाड़ दिया गया। अवैध रूप से बने छप्परों को ध्वस्त कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान भारी संख्या में प्रशासन व पुलिस फोर्स मौजूद रही।
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रविवार को करछना तहसील प्रशासन ने पुलिस फोर्स के साथ रामपुर, सेमरहा, गड़ैला, खजुरौल, लटकहा समेत कई गांवों की चार हजार बीघे सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया। भूमाफिया तहसील प्रशासन को गुमराह करके पांच सौ बीघे से अधिक सरकारी भूमि पर परवल की खेती कर रहे थे। इसी के साथ अन्य भागों की घेराबंदी करके उसे कब्जे में कर रखा था। कार्रवाई के दौरान उपजिलाधिकारी विनय सिंह, सीओ रत्नेश सिंह, नायब तहसीलदार अजय गुप्ता, इंस्पेक्टर पंकज तिवारी, एसओ घूरपुर ओम शंकर शुक्ला, इंस्पेक्टर नैनी, एसआई अजीत उपाध्याय, एसआई रविंद्र कुमार, एसआई सुमित श्रीवास्तव, कमलेश दुबे, अजीत शर्मा, रमेश पांडेय समेत भारी संख्या में राजस्व टीम व पीएसी के जवान मौजूद रहे।

दर्ज होगा मुकदमा
करछना में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा व खेती करने के मामले में प्रशासन ने कई भूमाफिया को चिन्ह्ति किया है। एसडीएम विनय सिंह व सीओ रत्नेश सिंह ने संयुक्त रूप से बताया कि तीन बड़े भूमाफिया का नाम सामने आ रहा है। जल्द जांच कराकर सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
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बिहार व झारखंड से खेती करने आते हैं मजदूर
करछना के गंगा कछारी इलाकों में भूमाफिया सरकारी जमीन कब्जा करके पांच हजार से आठ हजार रुपये प्रति बीघा बिहार, झारखंड व आसपास के मजदूरों को दे देते हैं। साल भर वे छोटे-छोटे छप्पर बनाकर उसी में निवास करते हुए फसलों की रखवाली करते हैं।

कीमती जमीन फिर भी सरकार लापरवाह
करछना के इलाके में चार हजार बीघे सरकारी जमीन की कीमत करोड़ों रुपये आंकी जाती है। प्रशासन मामले में भूमाफिया पर बार-बार कार्रवाई भी करता है लेकिन कुछ महीनों के बाद ही पुन: कब्जा हो जाता है। ग्रामीण मानते हैं कि सरकार व प्रशासन उपरोक्त भूमि के लिए विशेष व्यवस्था करे जिससे अवैध कब्जा रुक सके।
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सैकड़ों बीघे परवल की फसल प्रशासन ने उजाड़ी
चार हजार बीघे सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर भूमाफिया करा रहे थे खेती
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