जीएसटी में माइग्रेशन न होने, रजिस्ट्रेशन निरस्त होने की तुरंत दें सूचना
0 वाणिज्य कर विभाग ने व्यापारियों को दिया अंतिम मौका, 26 के पहले खंडाधिकारियों को उपलब्ध कराना होगा डाटा
0 तमाम व्यापारियों को नहीं मिले आईडी, पासवर्ड, रजिस्ट्रेशन निरस्त होने के मैसेज ने भी बढ़ा दी है व्यापारियों की परेशानी
इलाहाबाद। जिन व्यापारियों के पैन अपडेट होने के बावजूद वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में माइग्रेशन के लिए अभी तक प्रोविजनल आईडी नहीं मिली या प्रोविजनल आईडी प्राप्त होने के बाद रजिस्ट्रेशन निरस्त होने का मैसेज आ रहा है, उन्हें अब परेशान होने की जरूरत नहीं है। राज्य वस्तु एवं सेवा कर (वाणिज्य कर) विभाग ने ऐसे व्यापारियों को एक मौका दिया है। वैट के तहत संबंधित खंड में रजिस्टर्ड ऐसे व्यापारियों का ब्योरा एकत्र करके अधिकारी 26 नवंबर तक मुख्यालय को भेजेंगे। इसके लिए मुख्यालय ने प्रारूप भी जारी किया है। कमिश्नर ने ऐसे व्यापारियों से तत्काल संबंधित खंड के अधिकारियों से संपर्क कर ब्योरा उपलब्ध कराने को कहा है। इसके लिए व्यापारी, व्यापार मंडल, अधिवक्ताओं को भी सूचना देने को कहा है ताकि निर्धारित तिथि के पहले खंडाधिकारियों का डाटा उपलब्ध हो सके।
प्रदेश में नौ लाख से अधिक व्यापारी वैट में रजिस्टर्ड हैं। जीएसटी लागू होने के पहले इन व्यापारियों को आईडी एवं पासवर्ड आवंटित किए गए, जिसके जरिए उन्हें जीएसटी में माइग्रेशन कराना था लेकिन जीएसटी लागू होने के साढ़े चार माह बाद भी काफी व्यापारियों के माइग्रेशन का काम पूरा नहीं हो सका। ऐसा व्यापारियों के पैन अपडेट न होने और गलत आईडी एवं पासवर्ड आवंटित होने से हुआ। जीएसटी में रजिस्ट्रेशन न होने से व्यापारियों को कारोबार में परेशानी हो रही है। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार कल्याण समिति के संयोजक संतोष पनामा समेत कई व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने इस संबंध में मुख्यालय को पत्र लिखा था। ऐसे में इन व्यापारियों को एक मौका और दिया गया है। इस संबंध में कमिश्नर मुकेश कुमार मेश्राम ने सभी जोनल एडिशनल कमिश्नर को आदेश जारी किया है।
कमिश्नर ने कहा है कि अधिकारी अपने सेक्टर के ऐसे व्यापारी जिनके प्रोविजनल आईडी एवं पासवर्ड पैन पर जनरेट नहीं हुए हैं, उनका पैन अपडेट करते हुए प्रारूप में टिन, रजिस्ट्रेशन का प्रकार, वर्तमान पैन, प्रोविजनल आईडी, नया पैन, पैन धारक का नाम, ट्रेड का विवरण भर मुख्यालय भेजें। जिनका माइग्रेशन हो चुका है और जीएसटी पोर्टल पर किन्हीं कारणों से रजिस्ट्रेशन निरस्त प्रदर्शित हो रहा है, उनका भी डाटा प्रारूप में भरकर भेजें। अफसरों को निर्देश दिया है कि वे खुद डाटा चेक करें, जिससे दोबारा गलती न हो। कमिश्नर ने साफ किया है कि इसके बाद भी व्यापारी माइग्रेशन से शेष रह जाते हैं तो विभाग की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी।