इस्लामी माह सफर- उल -मुरज्जब की 17 वीं को शहादत इमाम रजा पर रानी मंडी स्थित बच्चा जी धर्मशाला के पास अजाखाना साजिद अली से इस बार शहादत पर उठने वाला 78 वर्ष पुराना जुलूस नहीं निकाला जा सका। कोविड -19 की गाइड लाइन की वजह से जुलूस स्थगित कर दिया गया। अलबत्ता अजाखाना साजिद अली में मजलिस हुई। मजलिस में सोजख्वान जैगम अब्बास ने मर्सियाख्वानी में शहादत का मार्मिक अंदाज में जिक्र किया।
जाकिरे अहलेबैत रजा अब्बास जैदी ने शहादत इमाम रजा पर ढाए गए जुल्मोसितम की दास्तां सुनाई। गुलाब और चमेली के फूलों से सजाकर ताबूत इमाम रजा, गाजी अब्बास का अलम और जुलजनाह की शबीह की जियारत भी कराई गई। अंजुमन गुंचा -ए -कासिमियां के नौहाख्वान शादाब जमन, शबीह अब्बास जाफरी, अस्करी अब्बास, अखलाक रजा, जहीर अब्बास, कामरान रिजवी, अकबर रिजवी ने गमगीन नौहा पढ़ा। मजलिस के बाद महिलाओं ने भी नौहा और मातम का नजराना पेश करते हुए अलम ताबूत व जुलजनाह पर अकीदत का इजहार किया।
इस दौरान लोगों ने मन्नतें और मुरादें मांगी। मजलिस में जायर हुसैन, मंजर कर्रार, एजाज हुसैन, काजिम अब्बास, अहमद जावेद, कज्जन, सैयद मोहम्मद अस्करी, जामिन हसन, रिजवान अली, अख्तर,फर्रुख अब्बास मौजूद थे। उधर, बिसौना में हजरत इमाम हुसैन के चेहल्लुम के अवसर पर मजलिस सैयदुश शोहदा का आयोजन किया गया। इमामबाड़ा कदीम बिसौना में हुई मजलिस को मौलाना इंतजार आब्दी ने खिताब किया। शफक व साथियों ने सोजख्वानी के फराएज अंजाम दिए।
अंजुमन जुल्फेकारिया बिसौना, अंजुमन शब्बीरिया रानीमंडी ने नौहा और मातम का नजराना पेश किया। मजलिस के बाद शबीहे ताबूत व अलम को लोगों की जियारत को निकाला गया। मजलिस में तौसीफ रजा, हाशिम अब्बास, इफ्तेखार आबिद, कल्वे अब्बास, हसीन अब्बास, फजल अब्बास, मोहसिन रजा, अतहर अब्बास, वसीम अब्बास, शाहिद प्रधान, फैज अब्बास समेत तमाम लोग मौजूद थे।